राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 में होने हैं। इसकी तैयारियां राजनीतिक पार्टियों ने प्रदेश में अभी शुरू कर दी हैं। सत्ताधारी गहलोत सरकार भी दोबारा सत्ता पर काबिज होने के लिए मैदान में डटी हुई है। इसके लिए सरकार ने एक प्लान तैयार किया है। इसमें दिसंबर से शुरू होने जा रहे चुनावी वर्ष में हर माह एक बड़ी लोकलुभावन घोषणाएं करने की योजना है।
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, अशोक गहलोत सरकार चुनावी साल में जाने से पहले मतदाताओं को जोड़ने के लिए नई स्कीम पर काम कर रही है। इसी सिलसिले में दिसंबर में सरकार की चौथी वर्षगांठ से लेकर फरवरी में सरकार के आखिरी बजट तक में बड़े स्तर पर लोकलुभावन घोषणाएं की जाएंगी। नेताओं और अफसरों की एक कोर टीम को इस काम में लगा दिया गया है। चुनावी साल में होने वाली घोषणाओं को वोट बैंक पर फोकस करते हुए तैयार किया जा रहा है। फिलहाल सीएम के स्तर पर मंथन का दौर चल रहा है। इसके लिए पूरी एक टीम गोपनीय तरीके से अपना काम कर रही है। टीम प्रदेश के सभी जिलों से पॉपुलर डिमांड का सर्वे करने के बाद योजनाओं का खाका तैयार कर रही है।
सूत्र ने बताया कि छोटी-छोटी मांगों को पूरा करने वाली घोषणाओं को भी बजट में शामिल किया जाएगा। तहसील लेवल की सैकड़ों मांगें कई साल से लंबित चल रही हैं। उन्हें पूरा करने की घोषणा भी इस चुनावी वर्ष में की जाएगी। इसके अलावा टीम ने सीएम को यह को यह बताया बताया है कि इलाकेवार भावनात्मक रूप से अहम मांगों को पूरा करने का सियासी तौर पर ज्यादा फायदा हो सकता है। इनमें धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय स्तर की छोटी-छोटी मांगें हैं, लेकिन उनसे जनता की भावनाएं जुड़ी हैं। जिलों से ऐसी भावनात्मक मांगों का भी अलग से ब्योरा जुटाया जा रहा है।
कांग्रेस सरकार दिसंबर में चौथी वर्षगांठ के मौके पर बड़े स्तर पर कई अहम घोषणाएं करने की तैयारी में है। ये सभी स्कीम आम आदमी को सीधा फायदा पहुंचाने वाली होगी। इसमें सबसे ज्यादा फोकस किसानों, छात्रों, महिलाओं और कमजोर तबके के लोगों पर किया जा रहा है। इन्हीं तबकों के लिए चौथी वर्षगांठ से लेकर बजट तक कई घोषणाएं होंगी।