बीएमसी चुनाव को लेकर राज ठाकरे की मनसे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) के बीच गठबंधन हुआ था। हालांकि, इस गठबंधन के बावजूद दोनों पार्टियां बहुमत के आंकड़े से कोसों दूर नजर आईं। वहीं, भाजपा और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने बीएमसी चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर चुनाव में एमएनएस भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। यह जानकारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने दी।
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राज ठाकरे ने 15 जनवरी को हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों की समीक्षा के लिए मुंबई और आसपास के उपनगरों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के दौरान एमएनएस कार्यकर्ताओं ने सहयोगी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से कुछ वार्डों में कथित 'असहयोग' की शिकायतें रखीं।
उद्धव ठाकरे की पार्टी पर मनसे पदाधिकारियों ने जताई नाराजगी
एमएनएस पदाधिकारियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि शिवसेना (उबाठा) के साथ गठबंधन के तहत मुंबई में पार्टी को ऐसे वार्ड मिले, जहां जीत की संभावना बेहद कम थी। उल्लेखनीय है कि 227 सदस्यीय बीएमसी में एमएनएस ने 53 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल छह सीटों पर ही जीत मिली।
पार्टी नेता के अनुसार, राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अतीत की बातों पर ध्यान देने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ऊर्जा केंद्रित करें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बीएमसी मेयर चुनाव में भाजपा के साथ किसी तरह का तालमेल नहीं होगा।
बीएमसी में क्या रहा सियासी समीकरण?
बीएमसी चुनाव में भाजपा ने 89 सीटें जीतकर पहली बार सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया।
उसकी सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे) को 29 सीटें मिलीं, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं।
भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पास कुल 118 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है।
भाजपा-शिवसेना गठबंधन मेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार को आसानी से निर्वाचित करा सकता है। हालांकि मेयर चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
बीएमसी चुनाव में किसे कितनी सीटें?
कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 24 सीटें जीतीं। इसके अलावा एआईएमआईएम को आठ, एनसीपी को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और एनसीपी (एसपी) को एक सीट मिली।