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Judiciary: जजों के रिटायरमेंट की उम्र सीमा बढ़ाने को लेकर न्याय विभाग ने कही ये बात, संसदीय पैनल को दी जानकारी

Sun, 25 Dec 2022 08:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

न्याय विभाग ने यह भी कहा कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा बढ़ाने से काम नहीं करने वाले न्यायाधीशों की सेवा के वर्षों का विस्तार हो सकता है और सरकारी  कर्मचारियों द्वारा समान मांग उठाने पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। न्याय विभाग ने एक संसदीय पैनल से यह बात कही। 

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न्याय विभाग ने यह भी कहा कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जुलाई में संसद को बताया था कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 

विभाग ने कार्मिक, कानून और न्याय पर संसदीय पैनल के समक्ष प्रस्तुति दी। संसदीय पैनल की अध्यक्षता भाजपा सांसद और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कर रहे थे। 
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विधि और न्याय मंत्रालय के विभाग ने प्रस्तुति दी। इसमें उच्च न्यायालय और सर्वोच न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा बढ़ाने की संभावना सहित न्यायिक प्रक्रियाओं और सुधारों का विवरण शामिल था। 

विभाग ने कहा, सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने से कम प्रदर्शन करने वाले न्यायाधीशों को जारी रखा जा सकता है। इसने यह भी सुझाव दिया कि लंबित मामलों को कम करने और न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु  बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए। 

विभाग ने कहा, यदि उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों में पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करने, जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में मौजूदा रिक्तियों को भरने के प्रयास और अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए अन्य उपायों के साथ-साथ सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में वृद्धि पर विचार किया जाता है तो यह अनुचित होगा। 

इसने आगे कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से ट्रिब्यूनल, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को पीठासीन अधिकारी या न्यायिक सदस्य के रूप में रखने से वंचित हो सकते हैं। विभाग ने यह भी आग्रह किया कि सेवानिवृत्ति की आयु सीमा बढ़ाने का व्यापक प्रभाव हो सकता है। विभाग ने कहा, न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में वृद्धि का व्यापक प्रभाव होगा क्योंकि केंद्र और राज्य स्तर के सरकारी कर्मचारी, पीएसयू, आयोग आदि इसी तरह की मांग उठा सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे की समग्रता से जांच करने की आवश्यकता है। 

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। देश के 25 उच्च न्यायालयों के न्यायधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। 


एडब्ल्यूबीआई में संसद सदस्यों के निर्वाचन सरकार के अंतर्गत लाभ का पद नहीं 
वहीं, एक संसदीय पैनल ने कहा है कि भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) में संसद सदस्यों के निर्वाचन को सरकार के अंतर्गत लाभ का पद नहीं माना जा सकता है। AWBI ने दिसंबर 2018 में लाभ के पद पर संसदीय संयुक्त समिति से यह जांच करने का अनुरोध किया था कि क्या बोर्ड के लिए सांसदों का चुनाव या नामांकन लाभ का पद धारण करने जैसा है, इस प्रकार संसद के सदस्यों के रूप में उनकी अयोग्यता का कारण बनता है।

जिसके बाद भाजपा के सांसद सत्य पाल सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने हाल ही में संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इसमें समिति ने मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय से एडब्ल्यूबीआई को शामिल करने के लिए कदम उठाने को कहा है। समिति की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है एडब्ल्यूबीआई के बोर्ड के सदस्य के रूप में छह संसद सदस्यों का निर्वाचन करने का प्रावधान है जिनमें चार लोकसभा से और दो राज्यसभा से होते हैं, लेकिन 2007 के बाद से कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया गया है। 
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