फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रायसीना डायलॉग: CDS ने हाइब्रिड युद्ध लेकर कही ये बात, एडमिरल त्रिपाठी बोले- नौसेना हर चुनौती के लिए तैयार

Wed, 19 Mar 2025 09:22 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रायसीना डायलॉग, जो भारत का प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक सम्मेलन है, में सीडीएस जनरल अनिल चौहान और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान दोनों रक्षा अधिकारियों ने कई चुनौतियों और आत्मनिर्भरता पर अपने विचार रखे। 
विज्ञापन
रायसीना डायलॉग में सीडीएस जनरल अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के प्रमुख रक्षा अधिकारियों ने रायसीना डायलॉग 2025 में सुरक्षा चुनौतियों, नई तकनीकों और आत्मनिर्भरता पर अपने विचार रखे। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत के लिए परंपरागत युद्ध के साथ-साथ हाइब्रिड युद्ध की ट्रेनिंग देना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने गलत जानकारी को एक प्रमुख खतरा बताया, जो खासकर भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक, बहु-धार्मिक और बहु-जातीय देश के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - CDS: 'तकनीक सक्षम बना सकती है, लेकिन ये लोगों की जगह नहीं ले सकती', सीडीएस अनिल चौहान का बयान

'सिर्फ जमीन नहीं मस्तिष्क में भी लड़ा जाता है युद्ध'
सीडीएस ने कहा, यह युद्ध सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि मस्तिष्क में भी लड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि भारत को लंबे समय से असमान्य युद्ध का सामना करना पड़ रहा है, जिसे पश्चिमी देशों ने बाद में 'ग्लोबल वॉर ऑन टेरर' और 'चौथी पीढ़ी का युद्ध' जैसे नाम दिए। उनके अनुसार, तकनीक सिर्फ एक सहायक साधन है, लेकिन युद्ध में सैनिकों की मौजूदगी की जगह नहीं ले सकती।
विज्ञापन


भारतीय नौसेना हर चुनौती के लिए तैयार- दिनेश के त्रिपाठी
वहीं भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना को हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा और भविष्य की परिस्थितियों के अनुसार खुद को विकसित करना होगा। उन्होंने बताया कि पहले रक्षा तकनीक सिर्फ सरकारी अनुसंधान प्रयोगशालाओं या बड़ी टेक कंपनियों के जरिए आती थी, लेकिन अब कोई भी ऑनलाइन तकनीक खरीद सकता है और अपने स्तर पर नवाचार कर सकता है।

यह भी पढ़ें - Tariff War: 'आप पसंद करें या न करें, टैरिफ व प्रतिबंधों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल अब सच्चाई', बोले जयशंकर
विज्ञापन


इस समय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है और भारतीय स्टार्टअप्स और एमएसएमई इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार नवाचार योजनाओं के तहत 25 करोड़ रुपये तक की वित्तीय मदद दे रही है। उन्होंने आईएनएस सूरत का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत अब कम समय में अत्याधुनिक युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सरकार या सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंनेपूरे सरकार का दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें