वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के मूल्यांकन सिस्टम की तरह ही रेलवे ने भी ऐसी ही प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया के तहत रिपोर्टिंग अधिकारियों का मूल्यांकन उनके साथी और उनके अधीनस्थ अधिकारी कर सकेंगे। गौरतलब है कि अभी तक वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए केंद्र सरकार 360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली अपनाता है। इसके तहत ही इन अधिकारियों का प्रमोशन किया जाता है।
360 डिग्री मूल्यांकन प्रणाली की तर्ज पर शुरू की गई अपनी प्रकिया की जानकारी रेलवे ने 18 अगस्त को लिखे एक पत्र में दी थी। इसमें रेलवे बोर्ड ने कहा कि उसने अपनी वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) तैयार करते समय अधिकारियों का मल्टी सोर्स फीडबैक लेने का निर्णय लिया है। इस फीडबैक का डेटाबेस बनाने के लिए रेलवे ने SPARROW सिस्टम में एक ऑनलाइन लिंक बनाया है। यह एपीएआर 2022-2023 से प्रभावी होगा।
रेलवे ने अपने पत्र में बताया कि प्रत्येक अधिकारी के लिए हर साल अधिकारी और उन सभी अधीनस्थों को एक लिंक भेजा जाएगा जिनके लिए अधिकारी रिपोर्टिंग प्राधिकारी है। फीडबैक को अधिकारी के डेटा बेस में अक्षात रूप से दर्ज किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि ये पूरी प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होगी। सभी से बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष टिप्पणी/ग्रेडिंग देने का अनुरोध किया जाता है।
इसे लेकर रेलवे के अधिकारियों के एक समूह का कहना है कि एपीएआर प्रणाली से न केवल भारतीय रेलवे में कार्य संस्कृति में फर्क पड़ेगा बल्कि कुछ अधिकारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) भी होगी। एक अधिकारी ने कहा कि इस एपीएआर के लिए करीब 20,000 अधिकारी जांच के दायरे में आएंगे।
सूत्रों का कहना है कि रेल अधिकारियों के साथ ही रेलवे में काम करने वाले ठेकेदारों और विक्रेताओं जैसे गैर-रेलवे व्यक्तियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए इस प्रणाली का और भी विस्तार किया जा सकता है। हालांकि कई अधिकारियों ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों के लिए सिस्टम मौजूद है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि समिति के सदस्यों का मूल्यांकन कौन करेगा। हाल ही में रेलवे ने आठ कैडर वाली भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) बनाई है। इसके तहत रेलवे बोर्ड के महाप्रबंधक या अध्यक्ष बनने के नियमों में बदलाव किया गया है।