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रेलवे सुरक्षा: 24 साल में 90 फीसदी घटे बड़े हादसे, बेहतर रखरखाव से दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से आई कमी

Tue, 12 Nov 2024 06:44 AM IST
शुभम कुमार एके खंडेलवाल

सार

औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ से ज्यादा लोग 70,000 रूट किमी लंबे नेटवर्क पर यात्रा करते हैं। भीड़भाड़ वाले मौसम में यह संख्या प्रतिदिन 3 करोड़ तक पहुंच जाती है, जो एक और विश्व रिकॉर्ड है। भारत में प्रतिदिन लगभग 2 फीसदी आबादी सुरक्षित रेलवे से यात्रा करती है, जबकि चीन में यह आंकड़ा केवल 0.58 फीसदी है।
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भारतीय रेल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय रेलवे का सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित है, इसका श्रेय पिछले दशक की सोची-समझी पहलों को जाता है। भारतीय रेलवे 1 लाख करोड़ यात्री किमी (पीकेएम) से ज्यादा दूरी तय करती है और सालाना लगभग 685 करोड़ लोग रेल से यात्रा करते हैं। दूसरी तरफ चीन व्यापक रेल नेटवर्क और आबादी के समान आकार के बावजूद लगभग आधे यात्रियों (लगभग 300 करोड़ सालाना) का परिवहन करता है।
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परिणामी रेल दुर्घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट से भी सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार नजर आता है, जो 2000-01 के 473 से घटकर 2023-24 में केवल 40 रह गई है। यह पटरियों को बेहतर बनाने, मानव रहित लेवल क्रॉसिंग को खत्म करने, पुलों की नियमित निगरानी और स्टेशनों को डिजिटल बनाने जैसे प्रयासों से संभव हुआ है।

प्रतिदिन का रिकॉर्ड तोड़ा आकड़ा
औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ से ज्यादा लोग 70,000 रूट किमी (आरकेएम) लंबे नेटवर्क पर यात्रा करते हैं। भीड़भाड़ वाले मौसम में यह संख्या प्रतिदिन 3 करोड़ तक पहुंच जाती है, जो एक और विश्व रिकॉर्ड है। भारत में प्रतिदिन लगभग 2 फीसदी आबादी सुरक्षित रेलवे से यात्रा करती है, जबकि चीन में यह आंकड़ा केवल 0.58 फीसदी है।
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सुरक्षा पर फोकस 2023-24 में सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में 1 लाख करोड़ से अधिक के निवेश से भी स्पष्ट होती है। इससे रेलों, पुलों, पटरियों और संकेत प्रणालियों के रखरखाव में सुधार होगा, साथ ही ओवर और अंडरब्रिज बनेंगे। रेलवे सुरक्षा के पैमाने प्रति दस लाख ट्रेन किमी दुर्घटना संख्या (एपीएमटीके) 2000-01 के 0.65 से घटकर 2023-24 में 0.03 रह गई है। 

अत्याधुनिक तरीकों से बेहतर पटरी रखरखाव,
रेल वेल्ड विफलताओं पर अंकुश लगाने और मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए उन्नत तकनीक सहित कई अतिरिक्त उपायों के कारण यह संभव हुआ है। 2013-14 में केवल 700 आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल के मुकाबले अब आंकड़ा 1,667 है। परिसंपत्ति की विश्वसनीयता को और बढ़ाने के लिए पूरे नेटवर्क में रेल ग्राइंडिंग को लागू किया गया है।

कोहरे में मददगार बना जीपीएस आधारित फॉग डिवाइस
उपद्रवी गतिविधियों तथा तोड़फोड़, पटरियों से छेड़छाड़ और पटरियों पर अवरोध वस्तुओं को रखने जैसी समस्याओं को हल करने के लिए पटरी पर निरंतर गश्त की जाती है लोको पायलटों को कोहरे वाले क्षेत्रों में परिचालन में मदद करने के लिए जीपीएस-आधारित फॉग-पास डिवाइस की संख्या में वृद्धि कीगई है। इनकी संख्या 2014-15 के केवल 90 से बढ़कर 21,742 हो गई है। लोकोमोटिव में सतर्कता नियंत्रण उपकरणों की संख्या 2013-14 के 10,000 से बढ़कर 16,021 हो गई है।

सिम्युलेटर पर बढ़ा रहे लोको पायलट का कौशल
इसके अलावा, लोको पायलट अब ड्राइविंग कौशल और त्वरित प्रतिक्रिया की गति बेहतर बनाने के लिए सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। 2023-24 के दौरान 6 लाख से अधिक रेलवे कर्मचारियों ने विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्राप्त किए।

160 किमी रफ्तार पर भी सुरक्षित है एलएचबी कोच
दुर्घटनाओं से बचाव की विशेषताओं वाली एलएचबी कोचों पर भी ध्यान दिया गया है। ये कोच 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर भी सुरक्षित परिचालन के लिए निर्मित किए गए हैं। 2023-24 में 4,977 एलएचबी कोच तैयार किए गए हैं, जो 2013-14 के 2,467 से दोगुने से भी अधिक हैं। स्पष्ट ही भारतीय रेलवे यात्रा के लिए पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गई है।
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