ट्रायल कोर्ट ने बीते वर्ष मार्च में बीसी हनुमंतराजू को दोनों बेटियों को हर माह छह हजार और मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में पढ़ाई पर खर्च के लिए 1.04 लाख के भुगतान का निर्देश दिया था। पिता ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए हनुमंतराजू की याचिका को खारिज कर दिया।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि बेटियों का भरण- पोषण और उन्हें उत्कृष्ट शिक्षा दिलाना पिता की कानूनी बाध्यता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि वे उसकी तलाकशुदा पत्नी के साथ रह रही हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने नाबालिग समेत दो बेटियों के भरण-पोषण के लिए हर माह रकम देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
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जस्टिस अशोक एस किनागी की एकल पीठ ने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट पिता की आय को देखते हुए शादी होने तक प्रत्येक बेटी को हर माह छह हजार रुपये की रकम देने का जो फैसला सुनाया है, उसमें कुछ भी त्रुटि नजर नहीं आती। दोनों प्रतिवादी छात्राएं हैं। इनमें से एक नाबालिग भी है।
यह है मामला
ट्रायल कोर्ट ने बीते वर्ष मार्च में बीसी हनुमंतराजू को दोनों बेटियों को हर माह छह हजार और मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में पढ़ाई पर खर्च के लिए 1.04 लाख के भुगतान का निर्देश दिया था। पिता ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। दलील दी कि उसका पत्नी से तलाक हो चुका है और प्रतिवादी मां के साथ रहती हैं। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।