प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कानपुर ट्रेन दुर्घटना को साजिश करार दिए जाने के बाद से हाल के समय में कई ट्रेनों के पटरी से उतरने के संभावित कारण के तौर पर तोड़फोड़ किए जाने के संदेह को काफी बल मिला है। ट्रेनों के पटरियों से उतरने की घटनाओं की बढ़ती संख्या के बीच रेलवे ने पहले हाल में हुए इस तरह के 40 से अधिक वारदात के संभावित कारण के तौर पर ‘बाहरी हस्तक्षेप’ का हवाला दिया था। हाल में ट्रेनों के पटरियों से उतरने के पीछे तोड़फोड़ की आशंका जताते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इन घटनाओं की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।
20 नवंबर 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे कानपुर के निकट पटरी से उतरे थे। इसमें 150 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह 1999 के बाद भीषणतम ट्रेन दुर्घटना थी।
1999 में गाइसाल ट्रेन हादसे में 290 लोगों की मौत हुई थी। मोदी ने शुक्रवार को गोंडा में एक चुनावी रैली में कहा था कि कानपुर रेल दुर्घटना, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी, वह एक साजिश थी और षड्यंत्रकारियों ने सीमा पार बैठकर इसे अंजाम दिया। गोंडा नेपाल से सटा हुआ है।