सोशल मीडिया पर आजकल एक वीडियो वायरल है जिसमें कथित रुप से रेल मंत्री पीयूष गोयल कलमा पढ़ रहे हैं। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा है कि रेल मंत्री कलमा नहीं पढ़ रहे हैं, बल्कि वे किसी विशेष संदर्भ में कलमा के शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं। कलमा पढ़ने की एक धार्मिक रीति होती है जिसका मुस्लिम समाज के लोग अनुसरण करते हैं। मंत्री ऐसे किसी धार्मिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं, इसलिए इसे कलमा पढ़ा जाना नहीं कहा जाना चाहिए।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा कि रेल मंत्री के द्वारा बोले गए कुछ शब्दों को विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। लेकिन स्वयं रेल मंत्री को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे किन शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब मुस्लिम समाज के कुछ लोग वंदे मातरम गाने से भी मना कर रहे हैं, लोगों को स्वयं यह समझना चाहिए कि उन्हें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।
समाजवादी पार्टी के एक नेता के द्वारा भाजपा से जुड़े दुकानदारों का बहिष्कार करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह बेहद आपत्तिजनक सोच है। पूरे भारत का हिंदू समाज कभी इस तरह की सोच नहीं रखता। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता आजमखान जैसे लोग पहले भी भारत माता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते रहे हैं। समाज ने उनकी सोच का बहिष्कार किया जिसके कारण आज उनकी बुरी हालत हो गई है। अगर वे अब भी अपनी सोच को नहीं बदलते तो इसे समाज स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि आपसी झगड़े को मॉब लिंचिंग करार देकर एक वर्ग विशेष समाज को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। इससे बचने की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक नेता मॉब लिंचिंग जैसी कथित घटनाओं के खिलाफ हथियार रखने की बात कहते हुए सामने आया है। अगर समय रहते इस सोच को नहीं रोका गया तो इससे समाज की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है। स्थानीय सरकारों को ऐसी सोच रखने वाले लोगों, संगठनों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।