गर्मी पूरे चरम पर है, रेलवे यात्री प्यास बुझाने के लिए स्टेशनों पर बोतल बंद पानी महंगे दाम पर खरीद कर पीने को मजबूर हैं। बावजूद इसके रेलवे की वाटर वेंडिंग मशीन (डब्लूवीएम) प्लेटफार्मों पर लगाने की योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। जबकि इस योजना को अमल में लाने के लिए पिछले साल जून महीने में ही रेलवे ने सर्कुलर जारी कर आईआरसीटीसी को डब्लूवीएम लगाने को कहा था। देश की राजधानी में ही नई दिल्ली को छोड़कर किसी भी स्टेशन पर डब्लूवीएम नहीं लग पाई है। स्टेशनों पर वाटर वेंडिंग मशीन लगाने की प्रक्रिया बेहद सुस्त है।
रेलवे ने किफायती दरों पर पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए इंडियन कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) को 1600 वाटर वेंडिंग मशीनें लगाने के लिए लाइसेंस आवंटित किया है, इसमें पहले चरण में 381 स्टेशनों पर इस मशीन को लगना है लेकिन अभी तक महज 175 स्टेशन पर ही यह मशीन लगी है। हालांकि इसमें भी 37 स्टेशनों पर ही यात्रियों को इस सुविधा का लाभ मिल रहा है। रेल मंत्रालय का कहना है कि वाटर वेंडिंग मशीनों को लगाने में देरी का मुख्य कारण है लाइसेंसधारियों को निधि की व्यवस्था में हो रही है कठिनाई है। इन्हें लगाने के लिए अत्याधिक पूंजी निवेश की आवश्यकता है।
बता दें कि रिवर्स आस्मोसिस सिस्टम (आरओ) प्रोटो टाइप लगाने में 6 लाख रुपये का खर्च है। ए-1 और ए कैटगरी वाले स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर कम से कम एक और दो वाटर वेडिंग मशीन लगनी है। इसी तरह बी, सी, डी, ई कैटगरी वाले स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर भी वेडिंग मशीन लगाने की योजना है। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का भी मानना है कि पीने के पानी के बारे में बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त होती है। इसमें पानी की अपर्याप्त सप्लाई व दूषित पानी की शिकायतें शामिल हैं। इस तरह की शिकायत ना केवल स्टेशन बल्कि मंडल, जोन और रेलवे बोर्ड को भी प्राप्त होती है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इसे ही ध्यान कमें रखकर रेलवे ने भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुरूप यात्रियों को शुद्ध पानी मुहैया कराने का निर्णय लिया है।