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बाल यात्रियों से भी रेलवे ने की खूब कमाई

Wed, 12 Apr 2017 06:42 PM IST
amarujala.com- Presented by: अभिषेक
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फ्लैक्सी फेयर ही नहीं बाल यात्रियों से भी रेलवे अपनी जेब भर रहा है। बाल यात्रियों को आरक्षित बर्थ देने पर बर्थ का चार्ज लेकर रेलवे ने अपनी कमाई के जरिए को पहले से काफी बढ़ा लिया है। 5-12 साल के बच्चों को आरक्षित बर्थ देकर पिछले एक साल में रेलवे ने 914 करोड़ रुपये की कमाई की है जो पिछले साल की अपेक्षा 228 करोड़ रुपये अधिक है।
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कुल 17 जोन में उत्तर रेलवे ने बच्चों से सबसे अधिक कमाई कर रिकार्ड बनाया है। दूसरे नंबर पर दक्षिण रेलवे है। रेल मंत्रालय कॉमर्शियल विकास में ही नहीं यात्रियों की जेब भी ढीली करने में पीछे नहीं है।

एक तरफ जितनी भी नई ट्रेनें चल रही है, उनमें 15 प्रतिशत तक यात्रा किराया बढ़ा दिया गया है तो वहीं शताब्दी, राजधानी व दुरंतो ट्रेन में फ्लैक्सी फेयर लागू कर डायनेमिक यात्रा किराया वसूला जा रहा है। पहले तो बाल यात्रियों से आरक्षित बर्थ की बुकिंग भी हॉफ टिकट पर ही होती थी लेकिन नया फरमान जारी कर केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने 5-12 वर्ष के उम्र के बच्चों का
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भी आरक्षित बर्थ व्यस्कों की श्रेणी में ला दिया है। पिछले साल 21 अप्रैल से इस फरमान को लागू किया गया। जिसका फायदा रेलवे को मिल रहा है। 
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हाफ टिकट से हुई 686 करोड़ की कमाई

- फोटो : pti
रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल तक हॉफ टिकट पर आरक्षित बर्थ दिए जाने पर रेलवे को कुल 686 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। 21 अप्रैल 2016 से 20 मार्च 2017 तक इसमें वृद्धि हुई और रेलवे को कुल 914 करोड़ रुपये मिले।

नई दिल्ली-अहमदाबाद-नई दिल्ली स्वर्ण शताब्दी ट्रेन की बात करें तो रेलवे ने इस ट्रेन से अकेले 2 करोड़ 13 लाख रुपये अर्जित किए और इस ट्रेन से योजना लागू होने से अभी तक 10,635 बाल यात्रियों ने सफर किया।

बाल यात्रियों से सबसे अधिक कमाने में उत्तर रेलवे जोन सबसे ऊपर रहा। यहां पर यात्रा करने वाले बच्चों ने 214 करोड़ रुपये से जेब भरी। दक्षिण रेलवे जोन के बच्चों से 113 करोड़ की कमाई रेलवे को हुई तो पूर्व जोन से 45 करोड़ व मध्य जोन से 91 करोड़ रुपये रेलवे ने कमाया। बता दें कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों से ही रेलवे कोई यात्रा शुल्क नहीं वसूलता है।
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