इन प्राथमिकताओं को ‘भारतीय रेल के पांच प्रण’ कहा गया है। रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने प्रभार संभालने के बाद कर्मचारियों के लिए अपने पहले लिखित संदेश में कहा कि भारतीय रेल के पास 150 से अधिक वर्षों की अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली विरासत है।
सिन्हा ने लिखा, हाल के वर्षों में हमने रेल पथ, चल स्टॉक, स्टेशनों और टर्मिनलों में अभूतपूर्व निवेश किया है। सुरक्षा के सर्वोपरि होने पर उन्होंने कहा कि हमें यह मानकर चलना होगा कि हर दुर्घटना को रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम स्थापित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें, हम अपने कार्यक्षेत्र में मुस्तैदी से अपनी भूमिका निभाएं। दूसरों के लिए मिसाल पेश करें।
रेलवे बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष सिन्हा ने कहा, लोकसेवक की भूमिका में ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमें किसी भी कदाचार के खिलाफ कड़ाई से पेश आना होगा। साथ ही हमें अपने कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास जारी रखने होंगे।
निवेश कार्यान्वयन पर उन्होंने लिखा, भारत सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश से भारतीय रेल में अपना अपार विश्वास प्रदर्शित किया है।
ग्राहक सुविधाओं के ऊंचे मानक बनाएं
ग्राहक सुविधाओं और अनुभव को बेहतर बनाने के बारे में उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि हमारी सेवाएं उच्चस्तरीय और नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक होनी चाहिए। उन्होंने कहा, चाहे समय पालन, स्वच्छता, खान-पान हो या ग्राहकों की शिकायतों का निवारण। हर क्षेत्र में हमें सेवा का उच्चतम मानक बनाए रखना होगा। ग्राहक सर्वोपरि हैं, हमें अपने प्रयासों में उन्हें सर्वोच्च स्थान देना होगा।