कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भले ही रविवार को रामलीला मैदान की जन आक्रोश रैली में यह एलान किया कि कर्नाटक चुनावों के बाद वह कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे। लेकिन कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने का इरादा राहुल गुजरात चुनाव से भी पहले बना चुके थे। दरअसल उन्हें यह यात्रा 2017 के जून जुलाई में करनी थी, लेकिन लगातार चुनावी व्यस्तताओं की वजह से राहुल इसके लिए वक्त नहीं निकाल सके।
यह जानकारी देते हुए राहुल गांधी के बेहद करीबी सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से करीब एक साल पहले अप्रैल 2015 में राहुल जब केदारनाथ की यात्रा पर गए थे, उसके बाद से ही उनके मन में कैलाश मानसरोवर जाने की इच्छा भी हो गई थी। जिसे उन्होंने अपने करीबी लोगों से साझा भी किया था। इसके लिए बाकायदा योजना भी बनाई जाने लगी थी। तय किया गया था कि जल्दी ही वह कैलाश मानसरोवर की भी यात्रा करें।
इरादा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के पहले कैलाशी भोलेनाथ की शरण में जाने का था। फिर तय हुआ कि 2016 जून-जुलाई में यह यात्रा होगी। इरादा था कि इस यात्रा से राहुल के छवि परिवर्तन में खासी मदद मिलेगी और इसका लाभ कांग्रेस को गुजरात चुनाव में भी मिलेगा। लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की करारी हार के बाद यात्रा टल गई और उसका समय भी निकल गया। इसके बाद राहुल भी गुजरात विधानसभा चुनावों के प्रचार में व्यस्त हो गए। वहां उन्होंने सोमनाथ दर्शन से अपनी शिव भक्ति प्रदर्शित की।
गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भले ही भाजपा को राहत दी लेकिन राहुल और उनकी टीम का हौसला भी बढ़ा दिया। इसके बाद राहुल और उनकी टीम पहले कांग्रेस महाधिवेशन और फिर कर्नाटक चुनावों की तैयारी में जुट गई। इस व्यस्तता में कैलाश मानसरोवर की यात्रा की बात कहीं छूट गई, लेकिन हुबली में राहुल के हवाई जहाज की आपात लैंडिग के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने कैलाश मानसरोवर जाने के अपने इरादे पर अमल का मन बना लिया, जिसकी घोषणा उन्होंने खुद रामलीला मैदान के जन आक्रोश रैली में की।