वायनाड भूस्खलन
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पिछले दिनों केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं ने भयंकर तबाही मचाई। इस आपदा ने 300 से अधिक लोगों की जान ले ली। कई दिनों कि मशक्कत के बाद प्रभावित इलाके में राहत एवं बचाव कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शनिवार को प्रभावित इलाकों के दौरे पर हैं। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वायनाड की घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग कर चुके हैं।
ऐसे में सवाल है कि राहुल गांधी ने वायनाड की घटना को लेकर क्या मांग की है? क्या होती है राष्ट्रीय आपदा? क्या किसी घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जा सकता है? क्या पहले भी कभी ऐसा हुआ है? सरकार का इस पर क्या रुख है?
वायनाड में भूस्खलन
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पहले जानते हैं कि वायनाड की घटना क्या थी?
30 जुलाई की सुबह वायनाड जिले के मेप्पाडी के पास पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की तीन बड़ी घटनाएं हुईं। मेप्पाडी, मुंडक्कई टाउन और चूरलमाला में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ। पहला भूस्खलन भारी बारिश के दौरान रात करीब एक बजे मुंडक्कई टाउन में हुआ। बचाव अभियान अभी चल ही रहा था कि चूरलमाला स्कूल के पास सुबह करीब चार बजे दूसरा भूस्खलन हुआ। इसके चलते स्कूल और आसपास के घरों और दुकानों में पानी और कीचड़ भर गया। भूस्खलन के चलते आए पानी के तेज बहाव ने मेप्पाडी, मुंडक्कई टाउन और चूरलमाला में भीषण तबाही मचाई। इससे दो गांवों चूरलमाला और मुंडक्कई के बीच संपर्क भी टूट गया। पहाड़ियों से आए बड़े-बड़े पत्थरों ने 100 फीट लंबे कंक्रीट के पुल को नष्ट कर दिया।
आपदा के 13 घंटे बाद एनडीआरएफ और सेना के जवानों की एक टीम नदी पार कर मुंडक्कई पहुंची। मुंडक्कई, चूरलमाला से 3.5 किलोमीटर दूर है। भूस्खलन की घटना ने 300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। सैकड़ों लोग इस आपदा में घायल हुए। वहीं अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि वायनाड भूस्खलन में मरने वालों की सही संख्या की पुष्टि डीएनए परीक्षण के नतीजे मिलने के बाद ही हो पाएगी। गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि बरामद शवों और शरीर के अंगों के डीएनए नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं।
वायनाड में भूस्खलन के बाद बचाव और राहत कार्य में लगीं मेजर सीता शेल्के
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वायनाड में अभी क्या हो रहा है?
10 दिनों के अथक बचाव प्रयास के बाद, ज्यादातर राहत एवं बचाव कार्य गुरुवार (8 अगस्त) को पूरा कर लिया गया। भारतीय सेना के तिरुवनंतपुरम, कोझिकोड, कन्नूर और बेंगलुरु बटालियन के 500 सैन्यकर्मियों में से अधिकांश ने अपना मिशन पूरा कर लिया है। हालांकि, मद्रास इंजीनियर ग्रुप (एमईजी) के 23 सदस्य और डाउनस्ट्रीम सर्च टीम के 13 सदस्य वायनाड में ही रहेंगे, साथ ही 36 सैनिक बचाव अभियान जारी रखेंगे। हेलीकॉप्टर सर्च टीम भी अगले निर्देश तक सक्रिय रहेगी। इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को वायनाड दौरे पर भूस्खलन वाले इलाकों का हवाई और जमीनी सर्वे किया। प्रधानमंत्री जिले में चल रहे राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की समीक्षा भी कर रहे हैं।
केरल दौरे पर पीएम मोदी
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राहुल गांधी ने वायनाड की घटना को लेकर क्या मांग की है?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को भूस्खलन प्रभावित वायनाड का दौरा कर वहां हुई तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। कांग्रेस नेता ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री वायनाड में भूस्खलन की घटना को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करेंगे। राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'मोदी जी, भयानक त्रासदी का व्यक्तिगत रूप से जायजा लेने के लिए वायनाड आने के लिए धन्यवाद। यह एक अच्छा निर्णय है। मुझे विश्वास है कि एक बार प्रधानमंत्री को विनाश की भयावहता का प्रत्यक्ष अनुभव हो जाए तो वे इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर देंगे।'
वायनाड में भूस्खलन वाले इलाकों का हवाई सर्वे करते पीएम मोदी
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क्या होती है किसी आपदा की परिभाषा?
राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (NDMA) भारत में केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक एजेंसी है जो प्राकृतिक आपदाओं या मानव-निर्मित आपदाओं के आने पर किये जाने वाले कार्यों में समन्वय स्थापित करती है। इसके साथ ही यह एजेंसी आपदाओं से निपटने के लिए क्षमता-निर्माण का भी काम करती है। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अनुसार 'आपदा' को परिभाषित किया गया है।
एनडीएमए के अनुसार, 'आपदा का अर्थ किसी भी क्षेत्र में तबाही, दुर्घटना, विपत्ति या गंभीर घटना है। यह प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से, या दुर्घटना या लापरवाही से उत्पन्न हो सकती है। आपदा का नतीजा यह होना चाहिए जीवन की भारी क्षति या मानवीय पीड़ा या संपत्ति को नुकसान पहुंचे और नष्ट हो या पर्यावरण की क्षति हो या उसका ह्रास। या आपदा की ऐसी प्रकृति या परिमाण हो कि जिसका प्रभावित क्षेत्र के लोग सामना भी न कर सके।
चिंता में डूबे लापता लोगों के परिजन
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तो राष्ट्रीय आपदा क्या होती है?
वर्तमान में देश में किसी घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का कोई कार्यकारी या कानूनी प्रावधान नहीं है। 2013 में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने संसद को दिए एक जवाब में कहा था कि 'प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का कोई प्रावधान नहीं है'। हालांकि, जवाब में यह भी कहा गया था कि 'गंभीर प्रकृति' की आपदा के लिए, मौजूद प्रक्रिया का पालन करने के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त मदद पर भी विचार किया जाता है। 2013 में ही केदारनाथ की घटना को दुर्लभ गंभीरता वाली आपदा कहा गया था।
इससे पहले 10वें वित्त आयोग (1995-2000) ने एक प्रस्ताव की जांच की थी। प्रस्ताव यह था कि यदि कोई घटना किसी राज्य की एक-तिहाई आबादी को प्रभावित करती है तो उसे 'दुर्लभतम गंभीरता की राष्ट्रीय आपदा' कहा जाए। आयोग ने 'दुर्लभ गंभीरता की आपदा' को परिभाषित नहीं किया। हालांकि, वित्त आयोग ने यह जरूर कहा था कि दुर्लभ गंभीरता की आपदा का फैसला अनिवार्य रूप से हरेक मामले के आधार पर किया जाना चाहिए।
वायनाड में भूस्खलन
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'राष्ट्रीय आपदा' के मसले पर मौजूदा सरकार का क्या पक्ष है?
वायनाड में भूस्खलन से हुई तबाही के बाद कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग शुरू कर दी। इस मसले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरलीधरन ने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 'राष्ट्रीय आपदा' की अवधारणा मौजूद नहीं है, यह तथ्य यूपीए सरकार के कार्यकाल से ही है।
मुरलीधरन ने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित राज्य सरकारों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि आपदा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से मृतकों के परिवारों को दो लाख रुपये तथा घायलों के परिवारों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की थी।