सुप्रीम कोर्ट पहुंचा इंडिया गठबंधन
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कानूनी टीम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप उठाए गए हैं। इस मामले में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है। इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 11 नेताओं के नाम
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में 11 नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव शामिल हैं। इनके अलावा शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एम. ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई. टी. मोहम्मद बशीर के नाम भी याचिका में हैं।
निर्वाचन आयोग समेत चार प्रतिवादी
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है। विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए 'वोट चोरी' के आरोप लगाए हैं। साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।
राहुल-खरगे समेत नेताओं ने किए हस्ताक्षर
एसआईआर विवाद को लेकर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत 11 याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर रिट याचिका पर हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि राहुल गांधी की कानूनी टीम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका पहले ही दाखिल की जा चुकी थी।
CJI ने मुलाकात से किया था इनकार
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, सीजेआई ने यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल करने की सलाह दी।