दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली को यमुना से एक निश्चित मात्रा में पानी का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में दिया था। इस पानी को रोककर हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने के कारण हरियाणा सरकार पर अदालत की अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए।
राघव चड्ढा ने हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया और पेयजल उपलब्धता बढ़ाने की तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद चड्ढा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद हरियाणा ने 16 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा है। यह पानी दिल्ली तक आते-आते तीन दिन लग जाते हैं। इसके बाद पानी को शोधित कर घरों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के कुछ इलाकों में इस समय पानी का जो संकट चल रहा है, वह जल्दी ही खत्म हो जाएगा।
राघव चड्ढा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में तय किया था कि हरियाणा को रोजाना इतना पानी दिल्ली को देना है, लेकिन इसके बाद भी हरियाणा दिल्ली को उसका हक नहीं दे रही थी, यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और देश की राजधानी में रह रहे लोगों के जीवन के अधिकार का हनन है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। वे इसकी मांग सुप्रीम कोर्ट में करेंगे।
आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट है। इसे दिल्ली जल बोर्ड चलाता है। यमुना नदी का पानी दिल्ली में दो बड़े चैनल सीएलसी और डीएसबी के जरिए आता है। हैदरपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 200 एमजीडी से अधिक पानी साफ करके लोगों के घरों तक पहुंचाते हैं। यहां पर जिस मात्रा में पानी आएगा, उसी हिसाब से पानी को साफ करने की क्षमता को बढाएंगे।
चड्ढा ने कहा कि दिल्ली ने 945 एमजीडी पानी शुद्धिकरण का रिकॉर्ड बनाया था। हरियाणा से कम पानी मिलने के बाद इसमें कमी आ गई थी, लेकिन अब पानी दोबारा मिलने लगा है तो हम जल्दी ही इस स्तर को दोबारा प्राप्त करेंगे।
आप नेता का बयान बचकाना: भाजपा
राघव चड्ढा के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने आप नेता का बचकाना बयान करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब अदालत की टिप्पणी आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं के विरूद्ध होती है तो वे इसकी खुली अवमानना करने लगते हैं, लेकिन जब बात उनके पक्ष में होती है तो वे अदालत के मान-सम्मान की बात करने लगते हैं। आम आदमी पार्टी को पहले यह तय कर लेना चाहिए कि उसे संविधान और अदालत में कोई विश्वास रखना है, या नहीं।