क्या सरकार पर भरोसा नहीं है?
हमारी लड़ाई में पहले दिन से एमएसपी शामिल है। इस पर कुछ नहीं किया जा रहा है। जब तक कुछ नहीं होता आंदोलन चलता रहेगा। सरकार कमेटी बनाने की बात कह रही है, कभी किसी कमेटी का रिजल्ट आया है ? हम कैसे भरोसा कर लें? जब साल पर भर बैठे रहे तो कुछ महीने और सही। कभी तो सरकार मानेगी। बैठना हमारी मजबूरी है, अगर हम छोड़ कर चले गए तो सरकार हमें छोड़ देगी।
एमएसपी पर किसानों को सरकार की ओर से कोई आश्वासन मिला है?
पीएम को कहना चाहिए था कि कानून वापसी के साथ ही एमएसपी पर बातचीत को तैयार हैं। तो क्या किसान नहीं जाते, हम तो तैयार बैठे हैं। लेकिन आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की गई, क्योंकि लगा था कि कानून वापसी का एलान करने से पंजाब के किसान वापस चले जाएंगे। क्योंकि यही लोग तीनों कानून वापस लेने की बात पहले करते थे। हम ऐसे वापस जाने वाले नहीं।
एमएसपी पर कानून बनाने से निजी व्यापारी बाजार से बाहर हो जाएंगे। पूरा उत्पाद खरीदने की चुनौती सरकार पर आ जाएगी?
अब भी कोई न कोई तो खरीदता ही है, अगर सरकार गेहूं खरीदेगी तो उसे प्रोसेस करके आटा बनाएगी। गाँव के पास इंडस्ट्री आएगी। सरकार भी मुनाफा कमाए और आम आदमी को भी लाभ मिलेगा। सब कुछ व्यापारियों को क्यूं दे रखा है?
किसान दलहन-तिलहन से दूर क्यों?
सरकार दलहन और तिलहन पर एमएसपी देना शुरू करे और खरीद शुरू करे हम उसे उगाने लगेंगे। किसान मक्का 700-800 रुपये प्रति कुंतल बेच रहा है। उसे एमएसपी का भाव मिले तो उसे क्यूं न उगाए? ऐसा करने से कृषि में विविधीकरण अपने आप ही आ जाएगा। व्यवस्था हो तो पंजाब का किसान सरसों और मक्का उगाने लगेगा। तिलहनी-दलहनी फसलों का आयात नियंत्रित करके देश के किसानों को ही लाभ दिया जा सकता है।
लखीमपुर खीरी का मुद्दा भी ठंडा पड़ेगा?
अजय मिश्रा टेनी को क्यूं बर्खास्त नहीं किया गया? अब तो निकल कर भी आ गया कि गोली उसके बेटे की बंदूक से चली थी।