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IAS Puja Khedkar: मामले की जांच करेगा केंद्र सरकार द्वारा गठित पैनल, निजी कार में लाल बत्ती लगवाने का भी आरोप

Thu, 11 Jul 2024 04:56 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

 

 

IAS Puja Khedkar: पूजा खेडकर पर यह आरोप भी है कि उन्होंने अपनी पोस्टिंग के दौरान अपनी निजी कार में लाल-नीली बत्ती लगाई। इसके अलावा उन्होंने अपनी निजी कार में 'महाराष्ट्र सरकार' भी लिखवाया। पुणे पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है।

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पूजा खेडकर के घर पहुंची पुलिस - फोटो : ANI (वीडियो ग्रैब)
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विस्तार
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आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई हैं। अब केंद्र सरकार ने पूजा खेडकर से जुड़े विवाद की जांच के लिए एक सदस्यीय पैनल का गठन किया। सूत्रों के अनुसार कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के अतिरिक्त सचिव इस मामले की जांच करेंगे। खेडकर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में पद हासिल करने के लिए शारीरिक दिव्यांग श्रेणी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे के तहत मिलने वाले लाभों का दुरुपयोग करने का आरोप है। उन्हें बीते सोमवार को पुणे से वाशिम स्थानांतरित कर दिया गया था। बृहस्पितवार को उन्होंने विदर्भ क्षेत्र के वाशिम जिला कलेक्ट्रेट में सहायक कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला।

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निजी कार में लगाई लाल-नीली बत्ती, ‘महाराष्ट्र सरकार’ भी लिखवाया
पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पोस्टिंग के दौरान अपनी निजी कार में लाल-नीली बत्ती लगाई। इसके अलावा उन्होंने अपनी निजी कार में 'महाराष्ट्र सरकार' भी लिखवाया। पुणे पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस ऑडी कार का इस्तेमाल खेडकर ने किया है, वह किसी निजी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है। इसे लेकर पुलिस द्वारा पहले भी चालान जारी किया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘निजी कार में लगी लाल-नीली बत्ती लगी थी और साथ ही महाराष्ट्र शासन भी लिखा हुआ था। पुलिस लगातार मामले की जांच कर रही है। इस मामले में चालान पहले ही जारी कर दिया गया है और अब पुलिस उस कार की तलाश कर रही है।’ पुणे पुलिस पूजा खेडकर के घर भी पहुंची। पुणे पुलिस का कहना है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत पूजा खेडकर की ऑडी कार की जांच की जानी है। इस कार का इस्तेमाल प्रशिक्षु आईएएसए अधिकारी पूजा खेडकर द्वारा इस्तेमाल की गई थी। 

विवादों में फंसी पूजा खेडकर
दरअसल, पूजा खेडकर अपनी परिवीक्षा अवधि के दौरान ही विवाद में फंस गई हैं और अब उनके चयन को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा के दौरान पूजा खेडकर ने दावा किया था कि वह मानसिक रूप से दिव्यांग हैं और उन्हें देखने में भी समस्या है, लेकिन हैरानी है कि इसके बावजूद भी वे कार चला रहीं थीं। इसके अलावा सोचने वाली बात यह भी है कि बिना जांच के ही उनका प्रशासनिक सेवा में चयन हो गया, जिस पर अब विवाद हो रहा है। 
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आईएएस पूजा खेडकर के चयन पर क्या है विवाद
सिविल सेवा परीक्षा के दौरान पूजा खेडकर ने हलफनामा दायर कर दावा किया था कि वह मानसिक रूप से दिव्यांग हैं और उन्हें आंखों की भी परेशानी है। इस दावे की वजह से चयन में पूजा खेडकर को रियायत दी गई और कम नंबर्स के बावजूद उनका प्रशासनिक सेवा में चयन हो गया। विवाद इस बात पर है कि पूजा खेडकर ने छह अलग-अलग मौकों पर मेडिकल जांच में शामिल होने से किसी न किसी कारण से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद उनका चयन हो गया। 

ओबीसी वर्ग के दावे पर भी उठे सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता विजय कुंभार का दावा है कि पूजा खेडकर के पिता दिलीप खेडकर भी एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं और हाल ही में उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। अपने नामांकन के दौरान दिए हलफनामे में दिलीप खेडकर ने अपनी संपत्ति 40 करोड़ रुपये बताई थी। वहीं पूजा खेडकर ने खुद को ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर स्टेटस के लिए पात्र बताया था। यही वजह है कि आईएएस पूजा खेडकर के पिता की संपत्ति को देखते हुए उनके ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर स्टेटस को लेकर भी विवाद हो गया है। 

वीआईपी मांगों को लेकर फंसी आईएएस पूजा खेडकर
आईएएस पूजा खेडकर पर पुणे में बतौर प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी रहते हुए सत्ता के दुरुपयोग का आरोप है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कई विशेषाधिकारों की मांग की, जो प्रोबेशन अधिकारियों को नहीं मिलते हैं। आईएएस पूजा ने अपनी निजी ऑडी कार का इस्तेमाल किया और उस पर लाल बत्ती लगाई। साथ ही उन्होंने एक आधिकारिक कार, आवास, ऑफिस रूम और अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग की। ये भी आरोप है कि एडिश्नल कलेक्टर के छुट्टी पर रहने के दौरान आईएएस पूजा खेडकर ने उनके चेंबर पर कब्जा कर लिया और वहां अपनी नेमप्लेट लगा दी। इसके खिलाफ पुणे कलेक्टर ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की, जिसके बाद आईएएस पूजा खेडकर का पुणे से वाशिम ट्रांसफर कर दिया गया है।

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