बेहद सीधे और भोले-भाले स्वभाव का केतन इस फेक अकाउंट और सरप्राइज पार्टी के मैसेज को पूरी तरह सच मान बैठा। वह बिना किसी शक-शुब्हे के बेहद खुशी-खुशी सिया को साथ लेकर लोहागढ़ किले की ओर निकल पड़ा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सरप्राइज पार्टी के नाम पर उसे बुलाया जा रहा है, वह दरअसल उसकी हत्या का तयशुदा डेथ-ट्रैप है।
पुणे में हत्या, आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा
पूर्व नियोजित प्लान के तहत आरोपी चेतन चौधरी पहले से ही किले के एग्जिट रूट से होकर ऊपर पहुंच चुका था और किले के मंदिर में घात लगाकर केतन के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही केतन और सिया वहां पहुंचे, सिया ने आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा कर दिया। इसके बाद जब केतन बेखबर होकर गहरी खाई के ठीक किनारे खड़ा था, तभी पीछे से सिया ने उसके कंधे पर और चेतन ने उसके पैर पर पूरी ताकत से धक्का दे दिया। केतन संभल पाता या खुद को संभाल पाता, उससे पहले ही चेतन ने उसे बेरहमी से लात मारकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में धकेल दिया। इस दर्दनाक हादसे में मौके पर ही केतन की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने उस 'माही' नाम के फेक अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया।
- पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को हत्या हुई थी।
- पुलिस ने मंगेतर सिया, कथित प्रेमी चेतन और एक अन्य शख्स रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है।
- केतन को लोहागढ़ किले से धक्का देकर मौत के घाट उतारा गया।
- 'माही' नाम से बनाए गए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल हुआ, वारदात के बाद अकाउंड डिलीट किया।
- महाराष्ट्र की वडगांव मावल अदालत में दायर आरोपपत्र में संदेशों, तस्वीरों, मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और तकनीकी विश्लेषण प्रमाण पत्र, पांच प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सहित कई ठोस सबूत।
- हत्याकांड को अंजाम देने से पहले सिया ने पिछले साल मार्च में लोहागढ़ में हुई ऐसी एक अन्य घटना के बारे में ऑनलाइन जानकारी भी जुटाई।
- आरोपियों ने केतन की हत्या से पहले मर्डर से संबंधित फिल्में देखीं, ऑनलाइन खोजबीन के लिए एआई टूल- चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। पुलिस से बचने के तरीकों पर पॉडकास्ट भी सुने।
सुपारी किलरों से भी संपर्क
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि केतन को रास्ते से हटाने की साजिश मार्च 2026 से ही रची जा रही थी। शुरुआत में तीनों आरोपियों ने तय किया था कि केतन की हत्या नहीं करनी है, बल्कि उसे जिंदगी भर के लिए 'अपाहिज' बना देना है। इसके लिए उन्होंने दूसरे राज्यों के कुछ सुपारी किलरों से भी संपर्क साधा था। हालांकि, बाद में आरोपियों को डर लगा कि अगर बाहर का कोई अपराधी पकड़ा गया तो उनका भांडा फोड़ हो जाएगा। खास बात यह है कि आरोपियों ने जिन लोगों से संपर्क किया था, उनमें से एक व्यक्ति अब इस केस में पुलिस का मुख्य गवाह बन गया है।
एआई का इस्तेमाल और हत्या के लिए ठिकाने की तलाश
जब बाहर से सुपारी देने का प्लान फेल हो गया, तो मई के महीने में सिया, चेतन और रितेश ने फैसला किया कि वे खुद ही इस कांटे को रास्ते से निकालेंगे। पुलिस के चंगुल से कैसे बचना है और सबूतों को कैसे मिटाना है, इसके लिए आरोपियों ने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, क्राइम पॉडकास्ट सुने, कई मर्डर फिल्में देखीं और मेघालय के चर्चित 'सोनम केस' का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने लोनावला के टाइगर पॉइंट समेत कई पहाड़ी इलाकों की बाकायदा रेकी की। उन्होंने देखा कि टाइगर पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए आखिरकार उन्होंने 'लोहागढ़' किले को चुना। दरअसल, मार्च 2025 में लोहागढ़ किले पर एक युवती की गिरकर मौत हो चुकी थी। आरोपियों का हिसाब था कि वे पुलिस और लोगों के सामने यह झूठी कहानी गढ़ देंगे कि 'सेल्फी लेते वक्त केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया।'
केतन की बाली ट्रिप कैसे रद्द हुई?
6 जून को केतन और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए सीधे 'बाली' जाने वाले थे। लेकिन वहां जाने से ठीक पहले 4 जून को भी सिया ने केतन को लोहागढ़ ले जाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी, हालांकि वह प्रयास नाकाम रहा। इसके बाद 6 जून को जब वे मुंबई के लिए निकले, तो रास्ते में खालापुर के एक कैफे के वॉशरूम में सिया ने चुपके से केतन का पासपोर्ट फाड़कर फ्लश कर दिया। पासपोर्ट नष्ट होने के कारण केतन की बाली ट्रिप रद्द हो गई और आरोपियों के लिए लोहागढ़ में मर्डर करने का रास्ता एक बार फिर साफ हो गया।
इसके बाद 14 जून को सिया दोबारा केतन को लोहागढ़ किले पर ले गई थी। वहां उसने केतन को खाई में धक्का देने की कोशिश की, लेकिन केतन खुद को संभालने में कामयाब रहा। उस वक्त शक से बचने के लिए सिया ने तुरंत "सांप आया, सांप आया!" चिल्लाकर नाटक किया और उस दिन केतन बाल-बाल बच गया। आखिरकार 18 जून को 'माही' के फेक अकाउंट का दांव खेलकर आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दे ही दिया।
5,053 पन्नों की चार्जशीट, आरोपियों के हर झूठ का पर्दाफाश
खुद को बहुत चालाक समझने वाले इन आरोपियों को लगा था कि वे इस मर्डर को एक 'हादसा' साबित कर देंगे। लेकिन पुणे ग्रामीण पुलिस ने डिजिटल फॉरेंसिक, कॉल डिटेल्स, डिलीट किए गए डेटा, टेक्निकल सर्विलांस और 5 प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों की मदद से इस पूरी साजिश की एक-एक कड़ी को आपस में जोड़ लिया। शुक्रवार को दाखिल 5,053 पन्नों की इस मजबूत चार्जशीट के जरिए पुलिस ने आरोपियों के हर झूठ का पर्दाफाश कर दिया है और अब अदालत में इन तीनों को कड़ी से कड़ी सजा यानी फांसी के तख्ते तक पहुंचाने के लिए पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है।