सरकार ने पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाले आतंकी फंडिंग की घेराबंदी भी शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तान का दोष साबित करने वाला एक डोजियर एफएटीएफ को सौंपेगी, जिसमें पड़ोसी देश के आतंकी रिश्तों को बेनकाब कर उसे ब्लैक लिस्ट घोषित कराना है। पाकिस्तान को उसे ब्लैक लिस्ट करने की मांग की जाएगी।
पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में शामिल करने के लिए भारत ने अगले सप्ताह पेरिस में होने वाली एफएटीएफ की पूर्ण सभा और वर्किंग ग्रुप बैठक में भी अन्य देशों पर दबाव बनाने की तैयारी की है। बता दें कि पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकियों को होने वाली फंडिंग पर नजर रखकर सचेत करने वाला संगठन है।
एक भारतीय सुरक्षा एजेंसी के शीर्ष पद पर तैनात एक अधिकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां एफएटीएफ को दिया जाने वाला डोजियर तैयार कर रही हैं, जिसमें पुलवामा आतंकी हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने और उसे पाकिस्तान से मदद मिलने के सबूत शामिल हैं। डोजियर में जैश की तरफ से पहले अंजाम दी गई आतंकी वारदातों का भी ब्योरा होगा। साथ ही यह जानकारी भी होगी कि आईएसआई समेत तमाम पाकिस्तानी एजेंसियां किस तरह जैश की मदद कर रही हैं।
ब्लैकलिस्ट किए जाने पर पड़ेगा यह प्रभाव
एफएटीएफ की तरफ से ब्लैकलिस्ट किए जाने पर पाकिस्तान को मनी लांड्रिंग व आतंकी फंडिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में ‘असहयोगी’ घोषित कर दिया जाएगा। साथ ही आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी, ईयू जैसे आर्थिक मदद देने वाले वैश्विक संगठनों को पाकिस्तान का दर्जा घटाना पड़ेगा और मूडी, एसपी और फिच जैसी एजेंसियां भी उसकी रेटिंग घटाएंगी, जिससे उसकी पहले से ही संकट में फंसी अर्थव्यवस्था के पूरी तरह बरबाद होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
पहले से ही ग्रे-लिस्ट में है पाकिस्तान
बता दें कि एफएटीएफ ने भारत के दबाव में पिछले साल जुलाई में पाकिस्तान को अपनी ग्रे-लिस्ट में शामिल कर दिया था, जिसके बाद उसकी अर्थव्यवस्था को बेहद नुकसान हुआ था और अमेरिका ने भी आर्थिक मदद बंद कर दी थी। एफएटीएफ में फिलहाल कई देशों के दो क्षेत्रीय संगठन यूरोपियन संघ और खाड़ी सहयोग परिषद तथा 35 अन्य प्रमुख देश शामिल हैं। ईरान और उत्तरी कोरिया पहले ही एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में शामिल हैं।