केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर -जीएसटी- प्रणाली ने व्यापारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाया है, क्योंकि इसने बाजार का विस्तार किया है और उनके लिए कर अनुपालन के बोझ को घटाया है। उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय के लिए हुए चुनाव के परिणाम ने इस बात की फिर से पुष्टि की है।
अरुण जेटली ने यहां संवाददताओं से बातचीत में कहा कि जीएसटी और नोटबंदी जैसे दो बुनियादी सुधारों से देश की अर्थव्यवस्था को मध्यम एवं दीर्घावधि में लाभ होगा। उनका कहना है कि इससे कारोबार करना आसान हुआ, तभी तो उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय के चुनाव में लोगों ने भारतीय जनता पार्टी -भाजपा- पर भरोसा किया है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय के चुनाव के परिणाम घोषित हुए जिनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। राज्य के 16 नगर निगमों में से 14 पर इसी पार्टी के महापौर जीते हैं।
जेटली ने इससे पहले उत्तर प्रदेश एंव उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनावों की याद दिलायी जिसमें भाजपा को जीत मिली थी। उनका कहना है कि इन राज्यों के कारोबारी हब में भी भाजपा को जीत मिली है जिससे पता चलता है कि नोटबंदी से इनको कोई खास परेशानी नहीं हुई है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय का जो चुनाव परिणाम आया, उससे इसकी एक बार फिर से पुष्टि हुई है।
पढ़ें- जेटली बोले-नोटबंदी, GST का असर पीछे छूटा, चिदंबरम ने बताया सिर्फ गिरावट पर लगाम है ग्रोथ
चालू वित्त वर्ष के दौरान दूसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि अनुमानों से संबंधित एक सवाल के जवाब में जेटली ने कहा कि जीएसटी ने कारोबार और व्यापार को बहुत आसान बना दिया है। इसकी वजह से अब पूरा देश एक बाजार बन गया है और अब हर कारोबारी के लिए बाजार का आकार बढ़ गया है।
गौरतलब है कि बीते पांच तिमाहियों की गिरावट के बाद सकल घरेलू उत्पाद -जीडीपी- की वृद्धि दर में जुलाई-सितंबर की तिमाही में एक बार फिर से सुधार हुआ है। यह 6.3 फीसदी के स्तर पर रही है। जेटली ने कहा कि जीएसटी ने व्यापारियों के लिए कर अनुपालन के बोझ को भी कम किया है। अब व्यापारी को नयी प्रणाली में कई तरह के कर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है। कर दरों को भी तर्कसंगत बनाया गया है। अब किसी व्यापारी को टैक्स इंस्पेक्टरों का डर नहीं सताएगा।
कारोबारियों को उनसे उलझने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल नवंबर में लिए गए नोटबंदी के फैसले का असर एक-दो तिमाही तक रहा था, जबकि जीएसटी का असर तो महज एक तिमाही तक ही रहा है। अब विनिर्माण क्षेत्र में फिर से तेजी आ गई है।