मिशन के साथ भेजे गए बाकी 13 उपग्रह नैनो यानी छोटी श्रेणी के हैं। ये सभी व्यावसायिक उपग्रह हैं। इन्हें इसरो की व्यावसायिक शाखा न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड से हुए करार के तहत भेजा गया।
फ्लोक-4पी : ये 12 उपग्रह इस प्रक्षेपण के साथ भेजे गए। इनका काम पृथ्वी की निगरानी है।
मेशबेड : यह अपनी श्रेणी का अकेला उपग्रह है। इसका उपयोग कम्युनिकेशन तकनीक में होगा।
हमें यह होंगे फायदे
- सामरिक के साथ ही शहरों के लिए बड़े स्तर पर विकास व निर्माण योजनाएं सटीकता से बनाने में मदद मिलेगी।
- ग्रामीण संसाधनों व बुनियादी सुविधाओं के विकास और तटीय क्षेत्रों में भूमि के उपयोग की जानकारी मिलेगी।
- मानव द्वारा या प्राकृतिक वजहों से धरती पर हुए छोटे-छोटे बदलाव भी यह पकड़ सकता है।
कैमरे की शक्ति : 509 किमी ऊपर से देख सकता है 25 सेमी की वस्तु
कार्टोसेट-3 में लगे कैमरे 509 किमी की ऊंचाई पर अंतरिक्ष से 25 सेमी तक की वस्तु देख सकते हैं। इसकी मदद से पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा सीमा व इर्द-गिर्द की जा रही गतिविधियों को पकड़ा जा सकेगा। ऐसा कैमरा अब तक किसी देश के पास नहीं है। इस समय अमेरिकी कंपनी वर्ल्ड व्यू - 3 के पास ऐसा उपग्रह है जो 31 सेमी तक की वस्तु को देश सकता है।
चंद्रयान-2 के 81 दिन बाद
इसी वर्ष सात सितंबर में चंद्रयान-2 के जरिए चांद की सतह पर लैंडर विक्रम को उतारने में पूरी सफलता न मिलने के मात्र 81वें दिन इसरो ने यहै सफल प्रक्षेपण किया है। चंद्रयान-2 के बाद यह इसरो का पहला मिशन है।