पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तरी किनारे पर स्थित न्यू टाउन में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने दावा किया है कि उन्हें पंचायत चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने नहीं दिया गया, क्योंकि असामाजिक तत्वों ने उन्हें क्षेत्र में मतदान केंद्रों में प्रवेश करने से रोक दिया था। बता दें कि राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली की 73,887 सीटों के लिए शनिवार को हुए चुनाव में कुल 2.06 लाख उम्मीदवार मैदान में थे। राज्य के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करीब 5.67 करोड़ लोग वोट देने के लिए पात्र हैं।
75 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षाविद् ने दावा किया कि उन्होंने मतदान केंद्र एपीजे अब्दुल कलाम कॉलेज में अपना वोट डालने के लिए दो बार प्रयास किए, लेकिन लोगों के एक समूह ने उन्हें रोक दिया। बुजुर्ग शख्स ने कहा, सबसे पहले उन्होंने मुझे सुबह आठ बजे रोका। कई लोगों ने मतदान केंद्र की ओर जाने वाली सड़कों को बैरिकेड्स से जाम कर दिया। फिर दोपहर करीब 12 बजे मैंने एक पड़ोसी के साथ बूथ पर जाने की कोशिश की, लेकिन हमें वापस लौटना पड़ा। मतदान केंद्र के बाहर खड़े लोगों ने बताया कि हमारा वोट दे दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, बाद में मैंने सुना कि उन्होंने टाउनशिप के अन्य बूथों पर भी ऐसा ही किया था।
न्यू टाउन फोरम के बैनर तले स्मार्ट सिटी के कुछ निवासी लंबे समय से टाउनशिप को पंचायत क्षेत्र में शामिल करने का विरोध कर रहे थे। मंच ने मतदान का बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया था।हालांकि, एक अन्य वर्ग ने कहा कि वे बहिष्कार के निर्णय से नाखुश हैं क्योंकि न्यू टाउन पंचायत का हिस्सा है और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए वोट डालना चाहते थे।
न्यू टाउन सिटीजन्स वेलफेयर बिरादरी के सचिव समीर गुप्ता ने कहा, हमने लोकतंत्र की हत्या देखी। उन्होंने कहा कि एपीजे अब्दुल कलाम कॉलेज को पुलिस बैरिकेड्स से घेर लिया गया था और किसी को भी वोट देने के लिए बूथ में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने दावा किया, बदमाश बसों में बम और पिस्तौल लेकर आए और हमें भगा दिया। गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि न्यू टाउन में ग्रामीण चुनावों के बहिष्कार का आह्वान फर्जी वोट डालने की योजना का एक हिस्सा था। कुछ निवासी, जो मतदान नहीं कर सके उन्होंने मतदान केंद्रों पर कथित बाधा और पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति के वीडियो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किए।
इस बीच, न्यू टाउन फोरम के अध्यक्ष समरेश दास ने सत्तारूढ़ टीएमसी पर वोट लूटने के लिए बहिष्कार आह्वान का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। स्थानीय सीपीआई (एम) नेता सप्तर्षि देब ने कहा कि सभी मतदान केंद्रों तक पहुंच मार्गों को अवरुद्ध कर दिया गया था और उन्हें शनिवार को अपने घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। बता दें कि टाउनशिप पहले दो सदस्यों वाला एक पंचायत क्षेत्र था, लेकिन कुछ महीने पहले परिसीमन के बाद प्रतिनिधियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई।