मणिपुर में विरोध प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
मणिपुर के चार जिलों के कुकी बहुल इलाकों में बुधवार को हजारों लोगों ने रैलियां निकालीं। ये रैलियां उखरूल जिले के एक गांव में 24 अप्रैल को हुई गोलीबारी की घटना के खिलाफ निकाली गईं। गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई थी। रैलियों में लोगों ने 2024 में जातीय हिंसा के दौरान सामने आए पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से जुड़े कथित ऑडियो टेप की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक कार्रवाई तेज करने की भी मांग की।
किन संगठनों ने आयोजित कीं रैलियां?
ये प्रदर्शन मानवाधिकार के लिए कुकी महिला संगठन (केडब्ल्यूओएचआर) और कुकी महिला संघ (केडब्ल्यूओ) की ओर से आयोजित किए गए थे। प्रदर्शन कांगपोकपी, चंदेल और तेंगनौपाल जिलों में किए गए। चुराचांदपुर शहर के कोईते मैदान में दोनों संगठनों के नेताओं ने 24 अप्रैल को उखरूल के मुलम और सोंगफेल गांवों पर हुए हमले की निंदा की। इन गांवों में कुकी समुदाय के लोग रहते हैं और यहां संदिग्ध उग्रवादियों के साथ गोलीबारी में दो लोगों की मौत हुई थी।
बीरेन सिंह के ऑडियो टेप मामले में जांच तेज करने की मांग
इन नेताओं ने यह भी कहा कि राज्य में हुए संघर्ष को लेकर सामने आए बीरेन सिंह के कथित ऑडियो टेप पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुद्दे पर तत्काल न्यायिक कार्रवाई की मांग की। केडब्ल्यूओएचआर ने इस ऑडियो टेप की ट्रांसक्रिप्ट सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी थी। इसमें एक व्यक्ति की आवाज राज्य में हुई जातीय हिंसा के बारे में बात करता सुनाई देता है। यह आवाज कथित तौर पर बीरेन सिंह जैसी बताई गई है।
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कोईते मैदान से 'वॉल ऑफ रिमेम्ब्रेंस' तक निकाली रैली
प्रदर्शनकारियों ने कोईते मैदान से रैली शुरू की और 'वॉल ऑफ रिमेम्ब्रेंस' तक मार्च किया। इस दौरान उन्होंने बीरेन सिंह के खिलाफ नारे लगाए और उनकी गिरफ्तारी की मांग की। बाद में उन्होंने चुराचांदपुर के उपायुक्त के जरिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ऑडियो टेप मामले में न्यायिक हस्तक्षेप और मुलम व सोंगफेल गांवों पर हमले को लेकर तुरंत कार्रवाई की मांग की गई।
राज्य जातीय हिंसा के बाद अब क्या स्थिति है?
मई 2023 से मणिपुर में घाटी में रहने वाले मेतेई और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा में 260 लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग बेघर हुए हैं। लगातार हिंसा और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे लगभग एक साल बाद चार फरवरी को हटा लिया गया।