इंडोनेशिया के बाली में एअर इंडिया के एक 40 वर्षीय पायलट की दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत हो गई। मंगलवार को दिल्ली से उड़ान भरकर बाली पहुंचे पायलट अपनी ड्यूटी के बाद होटल में आराम कर रहे थे। अचानक सीने में तेज दर्द के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एअर इंडिया ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है।
हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर विमान उड़ाने वाले पायलट अक्सर हमारी सुरक्षित यात्रा की गारंटी होते हैं। लेकिन क्या हो जब आराम के दौरान ही किसी पायलट की अचानक मौत हो जाए? इंडोनेशिया के बाली से एक बेहद दुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां एअर इंडिया के एक पायलट की अचानक जान चली गई, जिससे एयरलाइन कंपनी और विमानन क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
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यह दर्दनाक हादसा बुधवार को इंडोनेशिया के बाली में हुआ। एअर इंडिया का यह पायलट करीब 40 साल का था और फर्स्ट ऑफिसर के पद पर तैनात था। मंगलवार को ही इस पायलट ने सुरक्षित तरीके से दिल्ली से बाली तक की फ्लाइट उड़ाई थी। उड़ान के बाद वह नियमों के अनुसार होटल में आराम कर रहा था। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द हुआ, जो दिल का दौरा (हार्ट अटैक) साबित हुआ और उसकी मौत हो गई।
होटल के कमरे में अचानक क्या हुआ था पायलट के साथ?
पायलट अपनी फ्लाइट की ड्यूटी खत्म करने के बाद बाली के एक होटल में निर्धारित समय के लिए आराम कर रहा था।
आराम के दौरान ही उसे सीने में तेज दर्द और भारी बेचैनी महसूस हुई।
पायलट की शिकायत के तुरंत बाद उसे पास के एक अस्पताल में ले जाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसे गंभीर दिल का दौरा पड़ा है।
मेडिकल टीम की तमाम कोशिशों के बावजूद इस युवा पायलट को बचाया नहीं जा सका।
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इस घटना पर एअरइंडिया का क्या कहना है?
एअर इंडिया के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर इस दर्दनाक घटना की जानकारी दी है।
कंपनी ने अपने कॉकपिट क्रू मेंबर की अचानक हुई इस मौत पर गहरा दुख जताया है।
एयरलाइन ने कहा कि वे इस मुश्किल घड़ी में पायलट के परिवार के साथ हैं।
घटना से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी अभी तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाई है।
क्या पायलट को पहले से कोई गंभीर बीमारी थी?
एयरलाइन के एक अधिकारी ने साफ किया है कि पायलट को पहले से कोई ज्ञात बीमारी नहीं थी। पायलट ने कुछ महीने पहले ही सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट पास किए थे। यह मेडिकल टेस्ट विमानन नियामक (DGCA) के कड़े नियमों के तहत किए गए थे। अधिकारी ने यह भी बताया कि पायलट ने तय उड़ान समय (फ्लाइंग-आवर्स) की सीमा के भीतर ही काम किया था, यानी उस पर काम का अतिरिक्त दबाव नहीं था।