केंद्र सरकार के उस फैसले को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं, जिसमें कोरोना के लॉकडाउन के दौरान कर्मियों को परिवहन भत्ता नहीं देने की बात कही गई है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने वित्त मंत्रालय में व्यय विभाग के सचिव से उक्त आदेशों को वापस लेने की मांग की है। वित्त मंत्रालय का यह आदेश न केवल अप्रिय है, बल्कि यह नियमों का उल्लंघन भी है। मजदूर संघ के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के दौरान यात्रा भत्ता (ट्रांसपोर्ट अलाउंस) न देना, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।
वित्त विभाग में विभिन्न मंत्रालयों से यात्रा भत्ता को लेकर अनेक सवाल पूछे जा रहे थे। आदेशों में अस्पष्टता के चलते अनेक कर्मचारियों का भत्ता जारी नहीं हो सका। कोरोना संक्रमण के दौरान 23 मार्च से 20 अप्रैल और उसके बाद 20 मई तक हुए लॉकडाउन में बहुत से कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंच सके थे। कैलेंडर माह में उन्होंने ज्वाइन नहीं किया था।
ऐसे कर्मियों को घर से ही काम करने के लिए कहा गया था। इस वजह से अब उन्हें यात्रा भत्ता नहीं मिलेगा। वजह, इन कर्मियों ने कार्यालय आने के लिए कुछ खर्च नहीं किया है। दूसरा, जो कर्मी पूरे कैलेंडर माह में अपने घर से ही काम करते रहे, उन्हें भी भत्ता नहीं मिलेगा।
शारीरिक तौर पर विकलांग कर्मी और गर्भवती महिलाएं, जिन्हें कार्यालय आने से छूट प्रदान की गई थी, अब इन्हें भी उस अवधि का यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। डीओपीटी ने उनके कार्यालय नहीं आने के आदेश जारी किए थे। ये भी यात्रा भत्ते के हकदार नहीं होंगे। ऐसे अपात्र अधिकारी, जो घर से कार्यालय तक आने के लिए अस्थायी तौर पर सरकारी वाहन का इस्तेमाल करते रहे हैं, उन्हें भी भत्ता नहीं मिलेगा।