साल 2014 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से बड़ी बिल्लियों की आबादी में बढ़ोतरी देखी गई है। इतना ही नहीं संरक्षित क्षेत्रों के कवरेज में भी विस्तार हुआ है। अधिकारियों ने इसके लिए आंकड़े भी जारी किए हैं। बता दें कि आज पीएम मोदी अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से आए चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो-पालपुर अभ्यारण्य में बने बाड़ो में छोड़ दिया। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि किस तरह से बीते आठ सालों में बड़ी बिल्लियों की आबादी में इजाफा हुआ है....
बड़ी बिल्लियों की आबादी बढ़ी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत में बाघों की आबादी 2014 में 2,226 से बढ़कर 2018 में 2,967 हो गई। वहीं एशियाई शेरों की आबादी जो कि 2015 में 523 थी 2022 में 674 हो गई है। यानी 28.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं तेंदुओं की संख्या की बात करें तो यह 2014 में 7,910 थी लेकिन 2022 में भारत में 12,852 तेंदुए हो गए। यानी उनकी आबादी में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
पीएम मोदी के कार्यकाल में संरक्षित क्षेत्र भी बढ़े
2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से संरक्षित क्षेत्रों का कवरेज देश के भौगोलिक क्षेत्र के 4.90 फीसदी से बढ़कर 5.03 फीसदी हो गया है, अधिकारियों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। सरकार के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों ने कहा कि 2014 में 1,61,081.62 वर्ग किमी में 740 संरक्षित क्षेत्र थे और उनकी संख्या अब 1,71,921 वर्ग किमी के क्षेत्र के साथ 981 है।
देश ने 2018 में ही बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल कर लिया
भारत में 18 राज्यों में लगभग 75,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 52 बाघ अभयारण्य हैं, जिनमें जंगली बाघों की वैश्विक आबादी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा है। अधिकारियों ने कहा कि देश ने 2018 में ही बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो लक्षित वर्ष 2022 से चार साल पहले है।