78 वर्षीय पिता (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी) को मानसिक रूप से बीमार बता फ्लैट पर कब्जे की कोशिश बेटे पर भारी पड़ गई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिता की मानसिक स्थिति की जांच कराने की बेटे की मांग को खारिज करते हुए उसे ही पिता के फ्लैट से बेदखल कर दिया। साथ ही 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
पिता सिर्फ डायबिटीज के मरीज
सुनवाई के दौरान 54 वर्षीय बेटे ने खुद अदालत में अपनी ओर से दलीलें रखीं। कोर्ट ने कहा कि जिस मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर बेटे ने अपनी बात रखी थी, उससे सिर्फ यह पता चलता था कि उसके पिता डायबिटीज के मरीज थे। उन्हें इंसुलिन लेने के बाद हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम हो जाना) की समस्या होती थी, जिसके कारण भ्रम, उलझन, भूलने की आदत और पसीना आने जैसे लक्षण कुछ समय के लिए दिखाई देते थे। अहम बात यह है कि जजों ने कहा कि मेडिकल सर्टिफिकेट में खुद यह माना गया था कि ये लक्षण कुछ समय के लिए ही होते थे।
सौतेली मां पर भी लगाए थे आरोप
सुनवाई के दौरान बेटे ने पिता की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाने के साथ यह आरोप भी लगाया था कि उसके पिता अपनी डॉक्टर सौतेली मां के साथ अलग रहते हैं और उसे पिता से मिलने नहीं दिया जाता। बेटे ने पिता की मानसिक क्षमता पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि वह उनके खिलाफ चल रहे अलग-अलग दीवानी और आपराधिक मामलों में प्रभावी ढंग से पैरवी करने की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दावों को मानसिक बीमारी साबित करने का पर्याप्त आधार नहीं माना।