जिस तरह सुभाष चंद्र बोस से जुड़े तमाम दस्तावेजों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष चलने के बाद केन्द्र सरकार ने आखिरकार उनके तमाम पत्रों, दस्तावेजों और उनसे जुड़ी तमाम जानकारियां सार्वजनिक कीं। उसी तरह पंजाब और दिल्ली की सरकारें ये दावा करती रही हैं कि उनके आदर्श भगत सिंह हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी सरकारी कार्यालयों में भगत सिंह की तस्वीरें लगवाई हैं। ऐसे में अब ये मांग उठने लगी है कि भगत सिंह के ऐतिहासिक पत्रों और दस्तावेजों को सरकारी आर्काइव्स में रखा जाए और विश्वविद्यालयों में भगत सिंह के बारे में वो सारे तथ्य छात्रों के लिए उपलब्ध हों। भगत सिंह आर्काइव्स एंड रिसर्च सेंटर के सलाहकार और पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य प्रोफेसर चमनलाल ने पंजाब और दिल्ली सरकार को इस बारे में पत्र लिखा है।
प्रो. चमनलाल ने अपने पत्र में उन 135 फाइलों का जिक्र किया है जो भगत सिंह के जेल में रहते हुए उनकी अदालती कार्रवाइयों से जुड़ी हैं। इन फाइलों और दस्तावेजों को छात्रों के लिए उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई गई है ताकि भगत सिंह की देशभक्ति और उनके विचारों को समझने में मदद मिले। प्रो चमन लाल ने सुझाव दिया है कि दिल्ली और पंजाब के विश्वविद्यालयों में से एक एक विश्वविद्यालय का नाम भगत सिंह के नाम पर किया जाना चाहिए।
इन सरकारों को एक और अहम सुझाव दिया गया है कि हर तीन महीने पर स्कूली बच्चों को शहीद भगत सिंह खटकर कलां संग्रहालय, लुधियाना के शहीद सुखदेव के घर के अलावा करतार सिंह सराभा, मदनलाल धींगड़ा, शहीद उधम सिंह, राजगुरु, बीके दत्त और माता विद्यावती मेमोरियल में ले जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को शहीदों के विचारों और देश के प्रति उनकी गंभीर चिंता के बारे में विस्तार से समझने का मौका मिल सके।
गौरतलब है कि शहीद भगत सिंह और अन्य तमाम शहीदों पर लंबे समय से काम कर रहे प्रो चमन लाल लगातार देश के तमाम प्रमुख अखबारों में ये अभियान चला रहे हैं और अपने लेखों और शोधपत्रों के जरिये देश विदेश में इन शहीदों के क्रांतिकारी विचारों को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जो सरकार डॉ अम्बेडकर और भगत सिंह के नाम पर अपने विचारों और कार्यशैली को आगे ले जाने का दावा करती है, वह जरूर उनके सुझावों को गंभीरता से लेगी।