प्रवेश परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
- फोटो : Reuters
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ किया कि यह सवाल ही पैदा नहीं होता कि एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों को अपनी परीक्षाएं लेने की इजाजत दी जाए। हालांकि शीर्ष अदालत ने सीबीएसई से पूछा है कि क्या एनईईटी-दो परीक्षा में उन छात्रों को भी शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है जो एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट करने से इनकार किया कि राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं या नहीं। मालूम हो कि अदालत द्वारा सीबीएसई को नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट (एनईईटी) को दो चरणों में आयोजित करने की अनुमति देने केबाद राज्य सरकारों द्वारा एमबीबीएस और बीडीएस कोस के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। एनईईटी का पहला फेज एक मई को आयोजित हो गया जबकि दूसरा फेज 24 जुलाई को होगा।
पीठ ने कहा, हमने राज्यों के रेगुलेशन पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन एनईईटी प्रभावी है। वास्तव में अदालत ने तब यह टिप्पणी तब की जब वकील ने कहा कि ऐसा विचार बन गया है कि एमबीबीएस और डेंटल कोर्स के लिए राज्य अपनी परीक्षाएं ले सकते हैं।
सुनवाई केदौरान पीठ ने सीबीएसई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद से पूछा कि क्या जो छात्र एक मई को आयोजित एनईईटी-एक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं, क्या उन छात्रों को भी 24 जुलाई को होने वाली एनईईटी-दो परीक्षा शामिल होने की इजाजत मिल सकती है। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या एनईईटी-दो में 30 लाख अभ्यर्थियों को शामिल किया जा सकता है।