यदि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं तो इलाज के लिए अस्पताल का चयन करने से पहले ध्यान दीजिए। देश के निजी अस्पतालों में इलाज कराने का औसत खर्च सरकारी अस्पतालों के मुकाबले सात गुना ज्यादा महंगा साबित होता है। यह दावा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच किए गए सर्वे के आंकड़ों के आधार पर किया गया है।
एनएसओ की तरफ से शनिवार को नेशनल सैंपल सर्वे (एनएसएस) ऑन हाउसहोल्ड सोशल कंजम्पशन के 75वें दौर की रिपोर्ट जारी की गई। इसके मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने का औसत खर्च 4452 रुपये (ग्रामीण क्षेत्रों में 4290 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 4837 रुपये) आता है। लेकिन यदि बात निजी क्षेत्र के अस्पतालों की करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 27,437 रुपये और शहर में करीब 38,822 रुपये का खर्च किसी भी मरीज को करना पड़ता है।
इस हिसाब से निजी अस्पतालों में इलाज का औसत खर्च 31,845 रुपये बैठता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल (निजी और सरकारी) में भर्ती होने पर किसी भी मरीज को चिकित्सा खर्च के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 16,676 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि शहर में यही औसत खर्च 26,475 रुपये बैठता है। यह जानकारी करीब 1.13 लाख घरों का सर्वे करने के बाद सामने आई है। बता दें कि देश में इस तरह का यह चौथा सर्वे है। इससे पहले एनएसओ ने 1995-96, 2004 और 2014 में भी यह सर्वे कराया था।
यह भी आया सर्वे में सामने
- 42 फीसदी मरीज सरकारी अस्पतालों में होते हैं भर्ती
- 55 फीसदी मरीजों का इलाज करता है निजी क्षेत्र
- 2.7 फीसदी मरीज ही पहुंचते हैं चैरिटेबल अस्पतालों में
निजी क्षेत्र में 55 फीसदी बच्चों का जन्म होता है सर्जरी से
सर्वे में यह भी रोचक आंकड़ा सामने आया है कि निजी अस्पतालों में बच्चे का जन्म कराने के लिए 55 फीसदी मामलों में सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि इनमें से महज एक फीसदी को ही इसका खर्च नहीं उठाना पड़ता। इसके उलट सरकारी अस्पतालों में महज 17 फीसदी बच्चों का जन्म ही सर्जरी के जरिये कराया जाता है और करीब 92 फीसदी महिलाओं को सर्जरी के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता है।
यदि ओवरऑल आंकड़े की बात करें तो देश के निजी व सरकारी अस्पतालों में करीब 28 फीसदी बच्चे सर्जरी के जरिये इस दुनिया में कदम रखते हैं। सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 2404 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 3106 रुपये का खर्च माता-पिता को वहन करना पड़ता है। लेकिन निजी अस्पतालों में यही औसत खर्च बढ़कर 20788 रुपये (ग्रामीण) और 29105 रुपये (शहरी) पर पहुंच जाता है।