रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधा सरकारी व्यवस्था के तहत नहीं मिलेगी। एयरपोर्ट की तर्ज पर ही अब निजी कंपनी यात्री सुविधा को मुहैया कराएगी। सिर्फ रेल यातायात व्यवस्था पर ही नियंत्रण रेल मंत्रालय का रहेगा। बतौर पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली का आनंद विहार, चंडीगढ़, पुणे, बंगलूरू और सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन को इस योजना के तहत रेल मंत्रालय ने चुना है।
इसके अलावा रेलवे स्टेशन का इस्तेमाल अब व्यावसायिक के साथ-साथ रिहायशी उपयोकिि लिए भी किया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने रेलवे स्टेशनों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देने की स्वीकृति दे दी है। इसके तहत बड़े बिल्डर स्टेशनों पर ही लोगों को रहने के लिए आशियाना विकसित करेंगे। रेलवे ने अपने पुराने नियम में बदलाव कर स्टेशन विकसित करने वाली निजी कंपनियों को 45 साल की जगह 99 साल की लीज पर देने का निर्णय लिया है।
इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर संजीव कुमार लोहिया के अनुसार इंटिग्रेटेड मैनेजमेंट सिस्टम के तहत आनंद विहार, चंडीगढ़, पुणे, सिकंदराबाद, बंगलूरू स्टेशन पर यात्री सुविधा का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। 16 मार्च को टेंडर खोला जाएगा।
उन्होंने बताया कि यातायात व्यवस्था यानी ट्रेन चलाने का जिम्मा तो रेलवे के पास रहेगा, लेकिन टिकट जारी करना, प्लेटफार्म टिकट देना, स्टेशन पर खाने-पीने की व्यवस्था करना, डिस्प्ले बोर्ड लगाना समेत अन्य यात्री सुविधा प्राइवेट कंपनियों के जिम्मे रहेगा। ठीक उसी तर्ज पर होगा जिस तरह एयरपोर्ट पर निजी कंपनियां यात्री सुविधा मुहैया कराती है।
रेल बजट में 600 स्टेशनों को विकसित करने की घोषणा की गई है। इसके तहत स्टेशन के विकास के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। स्टेशन विकसित करने के लिए जिस बिल्डर को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी वह स्टेशन परिसर में ही आशियाना विकसित करेगा। इसके लिए बिल्डर को स्टेशन परिसर 99 साल की लीज पर दिया जाएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन के विकास का काम इसी साल दिसंबर महीने तक पूरा कर लिया जाएगा।