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आरटीआई खारिज करने में पीएमओ अव्वल

Sat, 19 Mar 2016 03:25 AM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • केंद्रीय सूचना आयोग की 2014-15 की वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा
  • पीएमओ ने 22 फीसदी आवेदनों को अस्वीकृत किया
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- फोटो : PTI
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विस्तार
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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने 2014-15 में सबसे ज्यादा आरटीआई आवेदन अस्वीकृत किए। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की रिपोर्ट के मुताबिक पीएमओ ने 22 प्रतिशत आरटीआई आवेदनों को अस्वीकृत किया। यही नहीं सभी केंद्रीय मंत्रालयों में 2014-15 में सबसे ज्यादा करीब 8 प्रतिशत आरटीआई आवेदन अस्वीकृत की गई।
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वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार आरटीआई की धारा 8 (1) का हवाला देकर सबसे ज्यादा 53 फीसदी आरटीआई अस्वीकृत की गई। हालांकि ये पिछले साल से करीब ढाई प्रतिशत कम है। इस धारा के तहत कहा गया है कि ऐसी सूचना को सार्वजनिक नहीं किया गया जिससे देश की अखंडता और संप्रभुता प्रभावित होती हो।

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिसिएटिव के आरटीआई प्रोग्राम कोआर्डिनेटर वेंकटेश नायक ने बताया कि आमतौर पर देखा गया है कि बिना तर्कपूर्ण आधार के धारा 8 (1) के तहत कई आरटीआई खारिज की जा रही है। पीएमओ को यह बताना चाहिए आखिर सूचना सार्वजनिक होने पर यह देश की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करेगी
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वसूली भी हुई कम

हालांकि कुछ केंद्रीय मंत्रालयों ने बहुत कम आरटीआई आवेदन अस्वीकृत किए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सबसे कम 0.9 प्रतिशत और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 1.7 प्रतिशत ने आरटीआई आवेदन खारिज किए हैं। केंद्रीय मंत्रालयों से इतर दिल्ली हाईकोर्ट ने 839 प्राप्त आवेदनों में 241 आरटीआई अस्वीकृत किए हैं।

2014-15 में सबसे ज्यादा आरटीआई खारिज की गई। रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 में 8.39 प्रतिशत, 2013-14 में 7.21 प्रतिशत, 2012-13 में 7.70 प्रतिशत, 2011-12 में 8.30 प्रतिशत और 2010-2011 में 5.10 प्रतिशत आरटीआई आवेदन अस्वीकृत किए गए।

लोक प्राधिकारियों द्वारा प्रार्थना पत्र शुल्क, अतिरिक्त शुल्क और दंड धनराशि के रूप में 2014-15 में 1 करोड़ 5 लाख 7 हजार 823 रुपये वसूले गए। जबकि रिपोर्ट के अनुसार पिछले सालों में 2013-14 में 1 करोड़ 14 लाख 6379 रुपए, 2012-13 में एक करोड़ 20 लाख 30 हजार, 2011-12 में एक करोड़ 59 हजार रुपए वसूले गए।
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