पीएम मोदी ने रैली में कहा कि असम की एक और बहुत बड़ी ताकत है पेट्रोलियम और इससे जुड़े उद्योग। दशकों तक कांग्रेस असम के इस सामर्थ्य पर भी बैठी रही। बीते छह साल में तेल और गैस के सेक्टर में असम में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से 90 साल से भी पहले अग्रेजों ने एक कानून बनाकर बैंबू को वृक्ष की कैटेगरी में डाल दिया था। ये कानून प्राइवेट जमीन पर उगाए गए बैंबू को काटने, उनके ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगाता था। आजादी के बाद भी 70 साल तक ये कानून ऐसे ही चला।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर साधा निशाना
50 साल से ज्यादा असम पर राज करने वाले लोग आजकल असम को पांच गारंटी दे रहे हैं। असम के लोग इनकी रग-रग से वाकिफ हैं। इन लोगों को झूठे वायदे करने की, झूठे घोषणापत्र बनाने की आदत पड़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस मतलब झूठे घोषणापत्र की गारंटी, कंफ्यूजन की गारंटी, अस्थिरता की गारंटी, बम, बंदूक और ब्लॉकेड की गारंटी, हिंसा और अलगाववाद की गारंटी, भ्रष्टाचार और घोटालों की गारंटी।
कांग्रेस को अपना खजाना भरने के लिए किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए - पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में NDA सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। लेकिन आज के कांग्रेस नेताओं को तो सिर्फ सत्ता से मतलब है, वो चाहे कैसे भी मिले। असल में कांग्रेस का खजाना अब खाली हो गया है, उसे भरने के लिए इन्हें किसी भी कीमत पर सत्ता चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खुद को सेकुलर बताते हैं, लेकिन असम, पश्चिम बंगाल और केरल में संप्रदाय के आधार पर बने दलों के साथ दोस्ती करते हैं। सत्ता के सामने इनको कुछ नहीं दिखता। इसी कारण अब कांग्रेस के लोगों की बातों पर देश में कोई भरोसा नहीं कर रहा।
चाय मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने पर असम सरकार गंभीर है - पीएम
पीएम मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस ने चाय बागान में काम करने वाले परिवारों को भी सालों तक अभाव में रखा। बीते पांच सालों में भाजपा ने चाय बागान में काम करने वाले साथियों के लिए पढ़ाई, कमाई और दवाई से जुड़ी जरूरतों के लिए एक के बाद एक कदम उठाए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि चाय जनजाति के साथियों और इस जनजाति से निकली महान विभूतियों को मान-सम्मान और स्वाभिमान का जीवन देने के लिए NDA प्रतिबद्ध हैं। टी गार्डन्स में काम करने वाले श्रमिक साथियों की दैनिक मजदूरी बढ़े इसके लिए भी असम सरकार पूरी तरह गंभीर है।