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शह-मात का खेल: प्रधानमंत्री ने शुरू की तैयारी, विपक्ष को मानसून सत्र का राजनीतिक लाभ नहीं लेने देंगे

Thu, 22 Jul 2021 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री मोदी को संसद के मानसून सत्र में कोरोना की दूसरी लहर को लेकर विपक्ष के जोरदार हमले की पूरी उम्मीद थी। इसे केंद्र  में रखकर प्रधानमंत्री ने संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार करके विपक्ष की आधी ताकत कम कर दी थी...
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संसद के बाहर विरोध करते के साथ राहुल गांधी - फोटो : Agency
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विस्तार
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विपक्ष ने पेगासस जासूसी, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर, किसानों के मुद्दे समेत कई ज्वलंत मामलों में केंद्र सरकार पर जबरदस्त दबाव बना रखा है। आज संसद भवन परिसर में राहुल गांधी भी महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने में शामिल हुए। इसकी राजनीतिक काट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुरू कर दी है। इसके बाबत उन्होंने रक्षा मंत्री और सदन के नेता राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, कानून मंत्री किरण रिजिजू समेत अन्य सहयोगियों के साथ भावी रणनीति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री की पूरी कोशिश विपक्ष के सभी राजनीतिक धार को कुंद करने की है।

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पिछले तीन दिन से संसद का मानसून सत्र ठीक तरीके से नहीं चल पा रहा है। गुरुवार को भी सदन की कार्यवाही विपक्ष के भारी शोरशराबे और हंगामे की भेंट चढ़ गई। पेगासस जासूसी मामले में सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विन वैष्णव संसद में सफाई देने के लिए खड़े हुए, लेकिन अपना बयान पूरा नहीं कर पाए। भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार के लिए स्थगित हो गई।

विपक्ष की आधी ताकत पहले ही कम कर चुके हैं प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी को संसद के मानसून सत्र में कोरोना की दूसरी लहर को लेकर विपक्ष के जोरदार हमले की पूरी उम्मीद थी। इसे केंद्र  में रखकर प्रधानमंत्री ने संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार करके विपक्ष की आधी ताकत कम कर दी थी। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के पद से डा. हर्षवर्धन की छुट्टी कर दी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की जिम्मेदारी नए मंत्रियों ने संभाल ली है। 43 चेहरों का कामकाज बदलने और नए मंत्रियों के आने तथा बड़े पैमाने पर पुराने मंत्रियों के केंद्र  सरकार से बाहर होने के बाद मोदी सरकार को बड़ा राजनीतिक लाभ मिला है।

जनता के बीच में प्रधानमंत्री की छवि निखरी है। लोगों के बीच में संदेश गया कि जो मंत्री कामकाज के मामले में कमजोर होते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री ने बाहर कर दिया है। हालांकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत अन्य ने इसे केंद्र  सरकार के मंत्रिमंडल में विस्तार की कोशिश को जनता की आंख में धूल झोंकना माना है। इन नेताओं ने कहा कि रेलगाड़ी का इंजन खराब है, लेकिन सरकार  सिर्फ डिब्बा बदल रही है।
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क्या रणनीति अपना सकती है केंद्र सरकार?

संसद के दोनों सदनों में केंद्र सरकार की पहली कोशिश सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलना सुनिश्चित करना ही है। समझा जा रहा है कि केंद्र सरकार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुभवों का लाभ ले सकती है। भाजपा और सहयोगी दलों के सांसदों के लिए गृह मंत्री अमित शाह रणनीति तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार की नजर कुछ आंतरिक घटनाक्रम या किसी विशेष प्रयास पर भी है। राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। गोयल विपक्षी दलों के नेताओं के संपर्क में हैं। ऐसा माना जा रहा है कि संसदीय कामकाज को धार देने के प्रयास के साथ-साथ सरकार विपक्ष पर दबाव बनाने के लिए राजनीतिक हमला भी जारी रखेगी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के पास ऐसे सवालों पर सधा जवाब रहता है। वह कहते हैं कि विपक्ष और खासकर कांग्रेस चाहती ही नहीं कि संसद में दोनों सदनों की कार्यवाही चले। महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो और देश आगे बढ़े। कांग्रेस की कोशिश केवल रोड़ा अटकाने की रहती है।
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