कुल राजस्व भी बढ़ा
सरकार ने यह भी बताया है कि जहां 2013-14 में कुल राजस्व 12,35,870 करोड़ था, वह अब बढ़कर 24,23,020 करोड़ हो गया है। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम हो जाने के बाद भी केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपने करों में कटौती इसलिए नहीं करती हैं क्योंकि ये कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत होते हैं। जबकि सरकारें यदि टैक्स में कटौती कर दें तो पेट्रोल सस्ता हो सकता है।
पिछले छह सालों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के माध्यम से कुल कर संग्रह में 307.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बढ़ जाने की मुख्य वजह उत्पाद शुल्क और वैट को ही माना जाता है। पहली बार ऐसा हुआ कि 250 से ज्यादा शहरों में पेट्रोल की कीमत शतक का आंकड़ा पार कर चुकी है। डीजल के दाम भी लगभग सभी शहरों में 89 प्रति लीटर से अधिक है।
जनवरी 2021 से अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें 66 से अधिक बार बढ़ाई गई है। पिछले सात सालों में एक्साईज शुल्क पेट्रोल पर 247 फीसदी और डीजल पर 794 फीसदी बढ़ाया गया है। वहीं पिछले सात महीनों में केंद्र सरकार ने एलपीजी की कीमत छह बार में 240 रुपये बढ़ा दी। आज संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था लेकिन विपक्ष ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमत और महंगाई को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।