राफेल सौदे पर मोदी सरकार और विपक्ष में जारी घमासान के बीच फ्रांस ने कहा कि इस सौदे में ऑफसेट पार्टनर चुनने को लेकर उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था। साथ ही फ्रांस सरकार ने दावा किया कि दो देशों के बीच हुए किसी भी सौदे की रक्षा के लिए उसका सिस्टम बेहद मजबूत है।
भारत में फ्रांस के राजदूत एलेक्जेंडर जेइगलर ने बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में दावा किया, ‘हमारी सरकार एक जिम्मेदार सरकार है। जब भी हम किसी देश के साथ कोई सौदा करते हैं, तो इसकी कीमत और आपूर्ति सरकार की जिम्मेदारी होती है। मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस सौदे में ऑफसेट पार्टनर चुनने के लिए फ्रांस सरकार पर किसी तरह का दबाव नहीं था।’ फ्रांस सरकार का बयान ऐसे समय आया है जब बुधवार को ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राफेल डील पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट संसद में पेश की है।
कैग की इस रिपोर्ट में यूपीए सरकार के दौरान हुई डील से ताजा रक्षा सौदे को 2.86 फीसदी सस्ता बताया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में राफेल की कीमत का उल्लेख नहीं है। मोदी सरकार ने फ्रांस सरकार के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है। जबकि, तत्कालीन यूपीए सरकार ने फ्रांस के साथ 126 लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा किया था। बताते चलें कि इस रक्षा सौदे में लड़ाकू विमान की कीमत और अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर चुनने पर विवाद है। इसको लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है।