पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर मचा घमासान अभी थमा नहीं था कि, जिले के डीएम मनीष मिश्रा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, केंद्र ने दार्जिलिंग के डीएम मनीष मिश्रा का डेपुटेशन मांगा था, लेकिन राज्य सरकार ने इससे मना कर दिया है।
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के हालिया दौरे को लेकर उठा प्रोटोकॉल विवाद अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए टकराव का कारण बन गया है। दार्जिलिंग के जिलाधिकारी मनीष मिश्रा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर बुलाने के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने उन्हें दिल्ली भेजने से इनकार कर दिया है, जिससे दोनों सरकारों के बीच विवाद और गहरा गया है।
राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद में केंद्र-राज्य में बढ़ा टकराव
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने के आरोप सामने आए थे। इसी मामले में केंद्र सरकार ने दार्जिलिंग के जिलाधिकारी मनीष मिश्रा और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी को केंद्रीय डेपुटेशन पर बुलाने का निर्देश दिया था।
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राष्ट्रपति के कार्यक्रम की प्रशासनिक जिम्मेदारी मनीष मिश्रा के पास थी और उन्हें तीन दिनों के भीतर दिल्ली में रिपोर्ट करने को कहा गया था। सूत्रों के मुताबिक केंद्र ने इस मामले में सिलिगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त से भी स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि राज्य सरकार ने अपने अधिकारियों को दिल्ली भेजने के बजाय प्रशासनिक फेरबदल का रास्ता अपनाया।
दार्जिलिंग डीएम मनीष मिश्रा को लेकर नया विवाद
राज्य सरकार ने मनीष मिश्रा का तबादला करते हुए उन्हें गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया है, जिसे पदोन्नति के तौर पर देखा जा रहा है। इसके साथ ही दार्जिलिंग में नए जिलाधिकारी के रूप में सुनील अग्रवाल की नियुक्ति की गई है। वे पहले उत्तर बंगाल विकास विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पहले ही विवाद चल रहा था। विपक्षी भाजपा ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और राज्य सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।