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Presidential Election: यशवंत सिन्हा बोले- राष्ट्रपति बनीं तो रबर स्टांप ही साबित होंगी द्रौपदी मुर्मू, पूरा देश चुकाएगा कीमत  

Tue, 05 Jul 2022 10:28 PM IST
Amit Mandal शशिधर पाठक, नई दिल्ली 

सार

यशवंत सिन्हा ने कहा- मूर्मू को कहीं आपने प्रेसवार्ता करते देखा। सात-आठ राज्यों में कर चुका हूं प्रचार और प्रेसवार्ता, मिल रहा है अभूतपूर्व समर्थन। 
 
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yashwant sinha - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राष्ट्रपति पद के विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अपनी प्रतिद्वंदी द्रौपदी मुर्मू पर फिर जोरदार हमला बोला है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कार्यप्रणाली के उन्मुक्त प्रशंसक पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और कामकाज के तरीके के उतने ही बड़े आलोचक हैं। वह कहते हैं कि लिखकर ले लीजिए, कदाचित द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनीं तो उनके रबर स्टांप राष्ट्रपति होने की ही संभावना है और रबर स्टांप राष्ट्रपति को चुनने की कीमत पूरे देश को चुकानी पड़ेगी।

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क्यों द्रौपदी मुर्मू होंगी रबर स्टांप ?
अमर उजाला से विशेष बातचीत में यशवंत सिन्हा कहते हैं कि इसके लक्षण अभी से साफ दिखाई देने लगे हैं। वह कहते हैं कि द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति के चुनाव में केवल प्रधानमंत्री और सत्ताधारी दल के भरोसे हैं। वह कहते हैं कि मैं 7-8 राज्य में चुनाव प्रचार कर चुका। 25 के करीब प्रेस वार्ता कर चुका। मुझे हर जगह अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है। वह पूछते हैं कि क्या द्रौपदी मुर्मू भी ऐसा कर रही हैं? 24 जून को नामांकन दाखिल करने के बाद से उनके द्वारा प्रचार किए जाने की आपको जानकारी है? उन्होंने आपसे या किसी मीडियाकर्मी से बात की या फिर कोई प्रेसवार्ता की? यशवंत सिन्हा कहते हैं कि उनकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है। प्रेसवार्ता प्रचार का अभिन्न अंग है। 4 जुलाई को वह रांची में थीं। क्या उन्होंने प्रेसवार्ता की?



दूसरी बात, आपको 24 जून की तारीख याद होगी। द्रौपदी मुर्मू बगल में खड़ी थीं और प्रधानमंत्री ने उनका नामांकन दाखिल किया था। अब 2007 में राष्ट्रपति चुनाव को याद कर लीजिए। मनमोहन सिंह कुर्सी पर बैठे हैं और तब राष्ट्रपति चुनी गई प्रतिभा देवी सिंह पाटील ने उनके बगल में खड़े होकर अपना नामांकन खुद दाखिल किया था।  
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रबर स्टांप राष्ट्रपति पद की गरिमा को खत्म कर देता है?
देश का राष्ट्रपति केवल बच्चों या लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए नहीं होता। महत्वपूर्ण मामलों में देश के प्रधानमंत्री को जरूरत पड़ने पर बुलाकर उनसे चर्चा करे। राष्ट्रपति के तौर पर पहल करे। यह राष्ट्रपति की गरिमा से जुड़ा मसला है। इस गरिमा को पद पर आसीन राष्ट्रपति ही बनाता है। आपके पास पिछले पांच साल का अनुभव है। हमें इस बारे में केवल इतना कहना है कि पद पर गरिमा के अनुकूल व्यक्ति को होना चाहिए। रबर स्टांप व्यक्ति राष्ट्रपति जैसे प्रथम नागरिक के पद की गरिमा को गिरा देता है। सिन्हा ने कहा कि मौजूदा समय में प्रधानमंत्री जिस तरीके से एकछत्र सरकार चला रहे हैं, वह और बेरोकटोक तरीके से चलना शुरू हो जाएगा। इसलिए आज की परिस्थिति में एक रबर स्टांप राष्ट्रपति नहीं होना चाहिए।

अभी तक कितने रबर स्टांप राष्ट्रपति देश में हुए?
इस सवाल के जवाब में यशवंत सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रपति पद पर रही जो शख्सियतें जीवित नहीं हैं, उनके बारे में क्यों कुछ कहा जाए? मेरा कहना है कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। उनका कार्यकाल दो बार का रहा। उन्होंने राष्ट्रपति की भूमिका को बखूबी निभाया था। राष्ट्रपति का काम केवल स्कूल के बच्चों को ट्राफी बांटना और फोटो खिंचवाना भर नहीं है। राष्ट्रपति की एक संवैधानिक भूमिका होती है।

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