राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की एकता को बनाए रखना कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए सिरदर्द बन गया है। शुक्रवार को होने वाली विपक्ष की बैठक से पहले कई दलों के बीच की आपसी कलह खुलकर सामने आ गई है।
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी माकपा के बीच जबरदस्त मतभेद हैं। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं से कहा है कि बंगाल में उनके कार्यकर्त्ताओं की पिटाई हो रही है।
ऐसे में उनके लिए दिल्ली में ममता बनर्जी के साथ बैठकर एकता दिखाना मुश्किल होगा। उधर, ममता यह संदेश देना चाह रही हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में मोदी को चुनौती देने के लिए वही विपक्षी एकता की अगुवाई कर रही हैं।
26 मई को संसद भवन परिसर की लाइब्रेरी में होने वाली बैठक के लिए सोनिया की लगभग सभी दलों के नेताओं से या तो मुलाकात हो चुकी है या फिर टेलीफोन पर बात हुई है।
दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने बैठक में आने से इनकार कर दिया है। उन्होंने सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से कहा है कि वह इतने शॉर्ट नोटिस में नहीं आ सकते। हालांकि नीतीश ने शरद यादव को बैठक में जाने को कहा है।