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राष्ट्रपति बोले... नागरिकता कानून बापू की 'इच्छा' का सम्मान, विरोध के नाम पर हिंसा ठीक नहीं

Fri, 31 Jan 2020 03:12 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

  • संयुक्त सत्र के अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा- विरोध के नाम पर होने वाली हिंसा देश को कमजोर करती है
  • उन्होंने अनुच्छेद 370, 35ए, तीन तलाक और राम मंदिर का भी किया जिक्र
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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद(फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की इच्छा का सम्मान बताते हुए इसके विरोध में हो रही हिंसा की निंदा की। सत्र के पहले दिन दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने सरकार की जमकर पीठ थपथपाई। 70 मिनट लंबे अभिभाषण में अनुच्छेद 370, राम मंदिर, तीन तलाक और अर्थव्यवस्था समेत कई मुद्दों पर सरकार की नीतियों को सराहा।

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अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा, सरकार ने नागरिकता कानून बनाकर बापू और भीमराव अंबेडकर की इच्छा को पूरा किया। शरणार्थियों को नागरिकता से किसी क्षेत्र की भौगोलिक-सांस्कृतिक स्थिति पर प्रभाव न पडे़ इसमें इसका भी प्रावधान है। राष्ट्रपति ने कहा, किसी मुद्दे पर वाद-विवाद और चर्चा लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं मगर विरोध के नाम पर हिंसा से देश और समाज कमजोर होता है।

भारत में आस्था रखने और नागरिकता के इच्छुक दुनिया के सभी पंथों के लोगों के लिए स्थितियां पहले की तरह ही हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की निंदा करते हुए उन्होंने विश्व समुदाय से आवश्यक कदम उठाने की भी अपील की।
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सीडीएस से रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा : सीडीएस की नियुक्ति और डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के गठन को राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, इससे सेना को और मजबूती मिलेगी। बाह्य सुरक्षा से जुड़ी जटिल चुनौतियों का सामना करने, सेनाओं को सशक्त, आधुनिक और प्रभावशाली बनाने में भी मदद मिलेगी।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के विकास का रास्ता खुला
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370, 35ए को हटाने के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा, अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में समान विकास का रास्ता खुला है। अब इन राज्यों को केंद्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं का भी लाभ मिलेगा।

तीन तलाक-बोडो समझौते का भी जिक्र 
राष्ट्रपति ने तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने की प्रशंसा करते हुए कहा, इससे महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के स्वाभिमान को बल मिला है। वहीं बोडो संगठनों के साथ केंद्र सरकार के समझौते को भी एतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, पांच दशकों से चली आ रही इस समस्या को खत्म करने के लिए  इस समझौते के दूरगामी परिणाम आएंगे।

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