राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)
चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ के चांद की सतह को छूने से चंद मिनटों पहले जमीनी स्टेशन से उसका संपर्क टूटने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ‘हम होंगे कामयाब, मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास कि हम होंगे कामयाब एक दिन’।
पावन चिन्तन धारा चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय युवा महोत्सव में अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जिस प्रकार से स्वामी विवेकानंद के विचार दुनिया भर के युवाओं को प्रेरित करते रहे हैं, उसी प्रकार से इसरो के अध्यक्ष के सिवन और उनकी टीम आने वाले समय में भारत में युवाओं का रोल मॉडल बनेगी।
उन्होंने कहा, मुझे याद है कि चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण पहले 15 जुलाई को निर्धारित किया गया था। मैं श्रीहरिकोटा में था। मैंने वृहद बाहुबली को काफी करीब से देखा । उसके बाद मैं उस स्थल तक गया। कोविंद ने कहा, मुझे जो सबसे अधिक अच्छा लगा, वह यह था कि इंजीनियरिंग टीम में पुरूषों के साथ काफी महिलाएं भी थीं।
वैज्ञानिकों के कार्यो की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार से एक महिला वैज्ञानिक ने उन्हें बताया कि वह अपने छह महीने के बच्चे को बंगलूरू में अपने माता-पिता के पास छोड़ कर आई थीं। गौरतलब है कि भारत के चंद्रयान-2 मिशन को शनिवार तड़के उस समय झटका लगा, जब लैंडर विक्रम से चंद्रमा के सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो का संपर्क टूट गया।
इसरो ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विक्रम लैंडर उतर रहा था और लक्ष्य से 2.1 किलोमीटर पहले तक उसका काम सामान्य था। उसके बाद लैंडर का संपर्क जमीन पर स्थित केंद्र से टूट गया। आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। कोविंद ने कहा कि चंद्रयान 2 को 22 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था और 50 दिनों तक यह पूरी तरह से सफल रहा ।