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मजबूरी में बढ़ानी पड़ेगी राष्ट्रपति प्रणब दा की सैलरी

Thu, 11 Aug 2016 03:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : file photo
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7वें वेतन आयोग की सिफारिशें सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में इजाफे की सौगात लाईं, तो वहीं राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए भी यह मौका सुनहरा साबित हो सकता है। मजबूरी में ही सही, इनकी सैलरी में भी डेढ़-दो लाख तक का इजाफा हो सकता है। ये बात हैरत में डालती है, लेकिन सच है। दरअसल, वेतन आयोग की सिफारिशों के चलते कैबिनेट सचिव की सैलरी राष्ट्रपति से भी ज्यादा हो गई है। कैबिनेट सचिव की लेटेस्ट सैलरी राष्ट्रपति से एक लाख रुपए ज्यादा है। 
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यह देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और राज्यपालों की सैलरी में जरूरी बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। 

मौजूदा वक्त में राष्ट्रपति को हर महीने डेढ़ लाख रुपए सैलरी मिलती है। उपराष्ट्रपति की सैलरी सवा लाख रुपए महीना है। वहीं, राज्यपाल को एक लाख दस हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है।

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद शीर्ष ब्यूरोक्रेट यानी कैबिनेट सचिव की सैलरी ढाई लाख रुपए महीना हो गई है, जबकि गृह सचिव की सैलरी दो लाख पच्चीस हजार रुपए महीना है। 
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2008 में बढ़ाई गई थी राष्ट्रपति की सैलरी

- फोटो : file photo
गृह मंत्रालय ओहदों की तुलना करने के बाद इस बात पर गौर कर रहा है कि सचिवों से ज्यादा राष्ट्रपति की सैलरी होनी चाहिए। सूत्रों की मानें तो इस गड़बड़ी को जल्द ही  ठीक किया जाएगा। 

इससे पहले 2008 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों की सैलरी बढ़ाई गई थी। 2008 तक राष्ट्रपति को 50,000 रुपए, उप राष्ट्रपति को 40,000 रुपए और राज्यपाल को 36,000 रुपए महीना मिलती थी।
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