राष्ट्रपति मुर्मू ने डूरंड कप टूर्नामेंट की ट्रॉफियों को हरी झंडी दिखाई
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डूरंड कप हमारे सर्वोच्च परंपराओं का प्रतीक- सीडीएस
मुख्य रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने कहा, डूरंड कप हमारे सशस्त्र बलों और देश की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतीक है – साहस, अनुशासन और एकता की विरासत। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता के एक और अध्याय की शुरुआत पर हमें भारत की राष्ट्रपति की उपस्थिति का गौरव प्राप्त हुआ है। यह आयोजन खेल, सेवा और भारतीय भावना के अटूट संबंध को फिर से स्थापित करता है।'
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भारत की एकता में विविधता का उत्सव- आरसी तिवारी
ईस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी और डीसीओसी के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी ने युवा फुटबॉल प्रतिभाओं के लिए डूरंड कप के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, सशस्त्र बलों की ओर से भारतीय सेना द्वारा आयोजित डूरंड कप एक फुटबॉल टूर्नामेंट से कहीं अधिक है। यह भारत की एकता में
विविधता का उत्सव है, प्रतिस्पर्धा के माध्यम से चरित्र निर्माण का विश्वास है और अनुशासन, टीमवर्क और आत्मबल जैसे समय-सिद्ध मूल्यों के जरिए अगली पीढ़ी को तैयार करने का दायित्व है।
सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव रहे हैं मना- झिंगन
कई बार राष्ट्रीय टीम की कप्तानी कर चुके संदेश झिंगन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, हम आज केवल एक ट्रॉफी का अनावरण नहीं कर रहे हैं, बल्कि उस विरासत और सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता और बलिदान के बल पर भारतीय फुटबॉल की यात्रा को आकार दिया है – वह परंपरा है डूरंड कप।
जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं- भवनीश
दिल्ली क्षेत्र के जीओसी और डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी की स्टैंडिंग वर्किंग कमेटी के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने कहा, डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसायटी लंबे समय से भारत में फुटबॉल को प्रोत्साहित करने की उत्कृष्ट परंपरा का प्रतीक रही है। हम इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली सभी टीमों को सफल और जोशपूर्ण मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं देते हैं।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को किया संबोधित
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इस बार पांच राज्यों में होगा मुकाबला
डूरंड कप, राष्ट्रपति कप और शिमला ट्रॉफी, ये तीनों प्रतिष्ठित ट्रॉफियां अब इस वर्ष की पांच मेज़बान राज्यों, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर, की बहु-शहर यात्रा पर रवाना होंगी। यह ट्रॉफी टूर जनता में उत्साह और सामुदायिक गौरव को प्रज्वलित करने का उद्देश्य लेकर टूर्नामेंट की 23 जुलाई 2025 से शुरूआत से पहले आयोजित किया जा रहा है। टूर्नामेंट का भव्य फाइनल 23 अगस्त 2025 को निर्धारित है।
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सपनों की विरासत, वादों का मंच
137 वर्षों से, डूरंड कप केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं रहा – यह भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा प्रतिभाओं के लिए लॉन्चपैड रहा है। भारत के कई दिग्गज फुटबॉलर, जिन्हें आज हर घर जानता है, ने अपने राष्ट्रीय करियर की शुरुआत डूरंड कप की पवित्र ज़मीन से की थी। इस टूर्नामेंट की सच्ची विरासत इसी वादे में निहित है – कि देश के हर कोने के अनजाने खिलाड़ी को खुद को साबित करने, पहचान बनाने और अपने सपनों को पाने का मौका मिले। इस वर्ष पहली बार डूरंड कप पांच राज्यों – पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, मेघालय और मणिपुर – में खेला जा रहा है। ऐसे समय में जब भारतीय फुटबॉल को नए नायकों और नई उम्मीद की तलाश है, डूरंड कप राष्ट्र निर्माण का मंच बना हुआ है – एक प्रतिस्पर्धात्मक अखाड़ा, जहां अकादमियों, सशस्त्र बलों की टीमों और देश के सबसे दूरदराज इलाकों के राज्य क्लबों के होनहार खिलाड़ी आगे आकर देश को प्रेरित करते हैं।
खेल, सेवा और बलिदान का उत्सव
डूरंड कप अनुशासन, एकता और खेल कौशल का प्रतीक है। आज का यह फ्लैग-ऑफ समारोह, जिसमें देश की शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रही, इस बात की पुष्टि करता है कि सशस्त्र बल पूरे भारत में प्रतिभाओं को निखारने और प्रतिस्पर्धी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए कितने समर्पित हैं। जैसे-जैसे ये ट्रॉफियां देश के फुटबॉल हृदय-स्थलों की यात्रा करेंगी, 134वां इंडियनऑयल डूरंड कप न केवल रोमांचक मुकाबले, बल्कि भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं में नए अध्याय जोड़ने का वादा करता है। मशाल जलाई जा चुकी है, मंच तैयार है – अब गांवों और शहरों में हजारों युवा खिलाड़ी इस टूर्नामेंट को केवल दर्शक
की नजर से नहीं, बल्कि सपने देखने वालों और भविष्य के चैंपियनों की नजर से देखेंगे।