देश का सबसे भारी
सैटेलाइट जीसेट-11 बनकर तैयार है। अब इसे दक्षिण
अमेरिका के फ्रेंच गुआना भेजने की तैयारी की जा रही है, जहां से कुछ हफ्तों बाद फ्रेंच एरियन-5 रॉकेट से इसे लांच किया जाएगा। सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सुविधा देने वाला यह देश का पहला उपग्रह होगा। इससे देश के टेलीकॉम सेक्टर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया योजना को नई ताकत मिलेगी। खासकर ग्रामीण भारत के लिए यह वरदान साबित होगा क्योंकि दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट सुविधा पहुंचाना आसान हो जाएगा।
जीसेट-11 का वजन 5725 किलोग्राम यानी छह कारों के बराबर है। यह आकार में भी काफी विशाल है। इसके एक-एक सोलर पैनल की लंबाई चार मीटर है। यानी एक आकार वाले कमरे में भी इसे नहीं रखा जा सकता है। जीसेट-11 को अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशन सेंटर में बनाया गया है। भारत इसे फ्रेंच एरियन-5 रॉकेट से लांच कर रहा है क्योंकि सिर्फ शक्तिशाली रॉकेट ही इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष कक्षा में पहुंचा सकता है। भारत के पास अभी इतना शक्तिशाली रॉकेट नहीं है।
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30 सैटेलाइट के बराबर क्षमता
सबसे भारी संचार सैटेलाइट जीसेट-11 में भारत की ओर से अब तक अंतरिक्ष में भेजे गए सभी संचार उपग्रह के बराबर ताकत है। यह अकेला पुराने 30 सैटेलाइट के बराबर है। यह एक साथ स्ट्र्रीमिंग डाटा के 32 बीम छोड़ सकता है।
इसरो चेयरमैन, एएस किरण कुमार- हमारा प्रयास देश को नई क्षमता प्रदान करना है। सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट बस एक प्रतीक है। हमें डिजिटल इंडिया के लिहाज से कनेक्टिविटी की जरूरत है। खासकर ग्राम पंचायत और सुरक्षा बलों के लिए।