महिला की मौत के मामले में अज्ञात पर हत्या का केस
पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे है। इस मामले की जांच करने वाले समिति ने अस्पताल पर कई गंभीर आरोप लगाए है। इससे पहले मृतका की परिजनों ने भी अस्पताल पर आरोप लगाए थे। परिजनों के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने 10 लाख रुपये लेने का बावजूद महिला को भर्ती नहीं किया और इलाज में देरी के कारण उसकी मौत हो गई थी।
जांच समिति ने अस्पताल पर लगाए आरोप
मामले में जांच के दौरान समिति ने बताया कि धर्मार्थ अस्पतालों को आपातकालीन मामलों में अग्रिम भुगतान मांगने से रोका गया है, लेकिन दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल ने इस नियम का उल्लंघन किया। राज्य स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राधाकिशन पवार की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सोमवार को पुणे पुलिस को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपातकालीन स्थिति में धर्मार्थ अस्पतालों को मरीज को तुरंत भर्ती करना चाहिए और उसे जरूरी इलाज देना चाहिए, लेकिन अस्पताल ने ऐसा नहीं किया।
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रिपोर्ट में ये बाते आई सामने
साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अस्पताल ने यह दावा किया था कि महिला साढ़े पांच घंटे तक अस्पताल में रही, लेकिन वह बिना किसी जानकारी के वहां से चली गई। समिति ने कहा कि अस्पताल ने मरीज को 'गोल्डन ऑवर्स' उपचार देने के नियम का पालन नहीं किया। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए चैरिटी कमिश्नर से सिफारिश की गई है।
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महाराष्ट्र महिला आयोग ने भी अस्पताल पर लगाया आरोप
वहीं महाराष्ट्र महिला आयोग की प्रमुख रूपाली चाकनकर ने भी इस मामले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से यह साफ है कि अस्पताल की गलती थी और उसे मानदंडों का पालन नहीं किया। चाकनकर ने बताया कि दो और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, एक मातृ मृत्यु जांच रिपोर्ट और दूसरी चैरिटी कमिश्नर की रिपोर्ट। इन रिपोर्टों के बाद ही अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही चाकनकर ने कहा कि मृतक महिला के परिवार ने अस्पताल पर आरोप लगाया है कि उसने मरीज की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक कर दी थी, और इसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।