ठाणे के शाहापुर इलाके में गांव चाफेवाड़ी में एंबुलेंस पहुंचने लायक सड़क नहीं है। जिसके कारण एक गर्भवती महिला को पालकी में एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक ले जाना पड़ा। इस दौरान महिला को रास्ते में दौरा पड़ गया है। जिसके बाद उसे ठाणे सिविल अस्पताल में इलाज के भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के शाहापुर इलाके में एक गर्भवती महिला को सड़क न होने के कारण 'डोली' (पालकी) में ले जाना पड़ा। यह घटना मुंबई से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर के एक गांव की है, जो ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं की हालत को उजागर करती है।
यह घटना सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे की है। 21 वर्षीय संगीता रविंद्र मुकने नाम की महिला को उसके गांव चाफेवाड़ी से एक किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक 'डोली' में ले जाया गया। उसे 'गाइडंड रोड' पर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। संगीता को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी था। लेकिन गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती क्योंकि वहां तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है।
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लोगों की मांगों को किया गया नजरअंदाज
वहीं इसे लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश खोदका ने कहा, 'हम 2025 में हैं, लेकिन हालात देखिए। मुंबई जैसे बड़े शहर के इतने पास होने के बावजूद यह गांव आज भी सड़क से वंचित है। अगर सड़क होती तो महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही इलाज मिल जाता।' उन्होंने बताया कि बार-बार मांग करने के बावजूद नाडगांव ग्राम पंचायत ने चाफेवाड़ी तक सड़क नहीं बनवाई। रास्ते में हुई देरी के कारण संगीता को एंबुलेंस तक पहुंचने से पहले दौरा पड़ गया। इसके बाद उसे तुरंत ठाणे सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत स्थिर बताई है।
घटना पर प्रशासन की चुप्पी
वहीं इस पूरे मामले पर नाडगांव ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को उजागर किया है।