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अच्छी खबर: ताकतवर एंटीबायोटिक बेअसर, नई दवा के मेल से 92 फीसदी मरीजों को राहत

सार

जब मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर होने लगती हैं तो उस स्थिति में गंभीर रूप से बीमार मरीज का इलाज चुनौती बन जाता है। हालांकि अब ऐसे मरीजों के लिए एक उम्मीद की किरण नजर आई है। 
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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जब संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया पर ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर होने लगती हैं, तो गंभीर मरीजों का इलाज बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे मरीजों के लिए सेफेपिम-जिडेबैक्टम दवाओं के मेल से उम्मीद जगी है। भारत समेत कई देशों के अस्पतालों में हुए एक अध्ययन में इस दवा से इलाज पाने वाले 60 मरीजों में से 91.7 फीसदी को चिकित्सकीय रूप से ठीक पाया गया। हालांकि, यह शुरुआती नतीजा है और इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए आगे भी अध्ययन जरूरी हैं। अध्ययन में कुल 72 वयस्क मरीजों को दवा दी गई। इनमें 68 मरीजों में ऐसे बैक्टीरिया का संक्रमण था, जिन पर कार्बापेनेम समूह की एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही थीं। इनमें से 56 मरीजों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया मेटालो-बीटा-लैक्टामेज (एमबीएल) नाम का एंजाइम बना रहे थे।
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भारत के कई प्रमुख अस्पताल भी अध्ययन में शामिल
अध्ययन में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, मेदांता, लखनऊ, एम्स, जोधपुर, अपोलो अस्पताल, हैदराबाद और सैफी अस्पताल, मुंबई समेत कई चिकित्सा केंद्रों के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मरीजों की हालत के अनुसार, उन्हें सात से 21 दिन तक नस के रास्ते दवा दी गई। इसके बाद संक्रमण पर दवा के असर और मरीजों की हालत में सुधार का आकलन किया गया।

भारत के कई प्रमुख अस्पताल भी अध्ययन में शामिल
अध्ययन में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, मेदांता, लखनऊ, एम्स, जोधपुर, अपोलो अस्पताल, हैदराबाद और सैफी अस्पताल, मुंबई समेत कई चिकित्सा केंद्रों के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। मरीजों की हालत के अनुसार, उन्हें सात से 21 दिन तक नस के रास्ते दवा दी गई। इसके बाद संक्रमण पर दवा के असर और मरीजों की हालत में सुधार का आकलन किया गया।
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