मोबाइल एप में दर्ज होंगे आंकड़े
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जनगणना 2027 में जुटाए गए आंकड़ों की शुद्धता, सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए एक योजना बनाई गई है। इसके तहत जनगणना पूरी होने के बाद उससे जुड़े सभी दस्तावेज का पूरा हिसाब देना अनिवार्य होगा। जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी सार्वजनिक करने, उसका गलत इस्तेमाल करने या गोपनीयता के नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने यह निर्देश जारी किए हैं।
मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का पहला चरण सभी राज्यों में पूरा हो चुका है। दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का काम लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फबारी वाले कुछ क्षेत्रों में पूरा हो गया है। गोवा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह काम दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच, जबकि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनवरी-फरवरी 2027 में होगा। इसके बाद जनगणना के करीब 100 तरह के आंकड़े डिजिटल और कागजी रूप में तैयार किए जाएंगे। इन्हें सुरक्षित रखना, व्यवस्थित करना और इनके आधार पर निष्कर्ष निकालना बड़ी चुनौती होगी।
गणना खत्म होने पर सात दिन में करनी होगी एंट्री
- इस बार प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े जुटाकर केंद्रीय सर्वर पर भेज रहे हैं। हालांकि, नेटवर्क की समस्या या दूसरी तकनीकी दिक्कतों के कारण कागजी प्रपत्रों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे प्रपत्रों का डाटा बाद में मोबाइल एप्लिकेशन पर दर्ज करना होगा।
- अगर प्रगणक ऐसा नहीं कर पाता है, तो चार्ज अधिकारी सीएमएमएस पोर्टल के निर्धारित मॉड्यूल से डाटा एंट्री की व्यवस्था करेंगे। कागजी प्रपत्रों के जरिये आंकड़े जुटाए गए सभी गणना खंडों की डाटा एंट्री जनसंख्या गणना की अवधि समाप्त होने के सात दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। पर्यवेक्षक यह सत्यापित करेंगे कि डिजिटल रिकॉर्ड मूल कागजी प्रपत्रों से मेल खाते हैं।
दस्तावेजों का हिसाब-किताब देना भी अनिवार्य
इस बार प्रगणक और पर्यवेक्षक मोबाइल से आंकड़े जुटाकर केंद्रीय सर्वर पर भेजेंगे। नेटवर्क या तकनीकी समस्या होने पर कागजी प्रपत्रों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इनका डाटा बाद में मोबाइल एप या सीएमएमएस पोर्टल पर दर्ज करना होगा। कागजी प्रपत्रों का डाटा जनसंख्या गणना खत्म होने के सात दिनों के भीतर दर्ज करना अनिवार्य होगा। पर्यवेक्षक जांचेंगे कि डिजिटल डाटा मूल कागजी प्रपत्रों से मेल खाता है या नहीं।
डाक विभाग को सौंपने से पहले पैकिंग की जांच
जनगणना की सामग्री को गणना खंड के हिसाब से अलग-अलग डिब्बों में रखा जाएगा। भरे और अधूरे प्रपत्रों व नक्शों को अलग पैक किया जाएगा। हर डिब्बे पर लेबल लगाकर उसमें रखी सामग्री की सूची बनानी होगी। डाक विभाग तय तारीख और समय पर सामग्री लेने आएगा। इसे सौंपते समय चार्ज अधिकारी को रसीद लेनी होगी। डाक विभाग सामग्री लेने के लिए दोबारा नहीं आएगा।
आग, बाढ़ और चूहों से भी बचाने होंगे रिकॉर्ड
जनगणना निदेशालयों को दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए जिला और चार्ज स्तर पर व्यवस्था करनी होगी। रिकॉर्ड को आग, बाढ़, बारिश, धूल और चूहों से बचाने के इंतजाम करने होंगे। हर डिब्बे की गिनती, उसमें रखी सामग्री की जांच और सभी रिकॉर्ड पूरे होने की पुष्टि भी करनी होगी। इन आंकड़ों का इस्तेमाल कोई भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था या व्यक्ति नहीं कर सकेगा।