आयातित कोयले से पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन का आदेश
बिजली की मांग में 20 फीसदी से ज्यादा वृद्धि को देखते हुए कोयला केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने आयातित कोयले से बिजली बनाने वाले सभी संयंत्रों को पूरी क्षमता से संचालित करने का आदेश दिया है। इससे पहले मंत्रालय ने सभी निजी व सार्वजनिक विद्युत उत्पादकों को निर्देश दिया था कि वे जरूरत का कम से कम 10 फीसदी कोयला आयात करें।
मंत्रालय ने बताया कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने की वजह से कोयला आयात काफी कम हो गया है, जिससे घरेलू कोयले पर अधिक दबाव पड़ रहा है। 2015-16 में 370 लाख टन कोयला आयात किया जा रहा था, जो 2021-22 में घटकर 240 लाख टन रह गया, जबकि बिजली की मांग बढ़ने से कोयले की मांग बढ़ती जा रही है।
विद्युत, कोयला व रेल मंत्रालय में तालमेल की कमी से हुई दिक्कत : एआईपीईएफ
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने मौजूदा बिजली संकट को विद्युत, कोयला व रेल मंत्रालय में तालमेल के अभाव का नतीजा बताया है। एआईपीईएफ ने केंद्र सरकार से कोयले के आयात पर राज्यों को मुआवजा देने का अनुरोध करते हुए कहा, केंद्र सरकार को राज्यों को कोयला आयात पर मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि घरेलू उत्पादन में कमी से उन्हें कोयला आयात करना पड़ रहा है।
बंद खदानों से बढ़ेगा उत्पादन
कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ट्वीट कर बताया कि 20 बंद पड़ी कोयला खदानों से फिर से उत्पादन शुरू करने का फैसला किया गया है। इन खदानों में अब भी करीब 3800 लाख टन कोयला मौजूद है। वहीं, मंत्रालय के सचिव एके जैन ने बताया आगामी दो-तीन वर्ष में कोयला उत्पादन 750-1,000 लाख टन तक बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए 100 से ज्यादा बंद पड़ी कोयला खदानों में फिर से खनन शुरू किया जाएगा।
उत्पादन से ज्यादा खपत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक, आयातक और उपभोक्ता है। देश में 2021-22 के दौरान करीब 7,772 लाख टन कोयला उत्पादन किया गया, जबकि 10,000 लाख टन कोयला इस्तेमाल किया गया। कोल इंडिया जो कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है, भारत का 80 फीसदी कोयला उत्पादन करती है।